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________________ ३०६ व्याख्याप्रज्ञप्तिसूत्र करण, एक योग से),६. द्विविध-एकविध (दो क.रण, एक योग से),७. एकविध-विविध (एक करण, तीन योग से), ८. एकविध-द्विविध (एक करण, दो योग से) अथवा ९. एकविध-एकविध (एक करण, एक योग से) प्रतिक्रमण करता है? ___ [६-२ उ.] गौतम ! वह त्रिविध-त्रिविध प्रतिक्रमण करता है, अथवा त्रिविध-द्विविध प्रतिक्रमण करता है, अथवा यावत् एकविध-एकविध प्रतिक्रमण करता है। १. जब वह त्रिविध-त्रिविध प्रतिक्रमण करता है, तब १. स्वयं करता नहीं, दूसरे से करवाता नहीं और करते हुए का अनुमोदन करता नहीं मन से, वचन से और काया से।२. जब त्रिविध-द्विविध प्रतिक्रमण करता है, तब स्वयं करता नहीं, दूसरे से करवाता नहीं और करते हुए का अनुमोदन नहीं करता, मन से और वचन से; ३. अथवा स्वयं करता नहीं, कराता नहीं और अनुमोदन नहीं करता, मन से और काया से; ४. या वह स्वयं करता, कराता और अनुमोदन करता नहीं, वचन सें और काया से। जब त्रिविध-एकविध प्रतिक्रमण करता है, तब ५. स्वयं नहीं करता है, न दूसरे से करवाता है और न करते हुए का अनुमोदन करता है, मन से, ६. अथवा स्वयं नहीं करता, दूसरे से नहीं करवाता और करते हुए का अनुमोदन नहीं करता, वचन से, ७ अथवा स्वयं नहीं करता, दूसरे से नहीं कराता और करते हुए का अनुमोदन नहीं करता है काया से। ___ जब द्विविध-त्रिविध प्रतिकमण करता है, तब ८. स्वयं करता नहीं, दूसरों से करवाता नहीं मन, वचन और काया से, ९. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं मन-वचन-काया से, १०. अथवा दूसरों से करवाता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन, वचन और काया से। जब द्विविध-द्विविध प्रतिक्रमण करता है, तब ११. स्वयं नहीं करता, दूसरों से करवाता नहीं, मन और वचन से; १२. अथवा स्वयं करता नहीं, दूसरों से करवाता नहीं, मन और काया से; १३. अथवा स्वयं करता नहीं, दूसरों से करवाता नहीं, वचन और काया से; १४. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन और वचन से; १५. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन और काया से; १६. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, वचन और काया से; १७. अथवा दूसरों से करवाता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन और वचन से; १८. अथवा दूसरों से करवाता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन और काया से; १९. अथवा दूसरों से करवाता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन और काया से। जब द्विविध-एकविध प्रतिक्रमण करता है, तब २०. स्वयं करता नहीं, दूसरों से करवाता नहीं, मन से; २१. अथवा स्वयं करता नहीं, दूसरों से करवाता नहीं, वचन से; २२. अथवा स्वयं करता नहीं, दूसरों से करवाता नहीं, काया से; २३. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, मन से; २४. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का अनुमोदन करता नहीं, वचन से; २५. अथवा स्वयं करता नहीं, करते हुए का
SR No.003443
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapati Sutra Part 02 Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages669
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Metaphysics, & agam_bhagwati
File Size14 MB
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