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________________ एकसप्ततिस्थानक समवाय चन्द्रमा का अयन - परिवर्तन, वीर्यप्रवाद पूर्व के प्राभृत, अजित जिन का गृहवासकाल, सगर चक्रवर्ती का गृहवासकाल और श्रामण्य । द्विसप्ततिस्थानक समवाय १२९ सुपर्णकुमारों के आवास, लवणसमुद्र की वेला का धारण, महावीर जिन का आयुष्य, आभ्यन्तर पुष्करार्ध में चन्द्र-सूर्य, बहत्तर कलाएँ, खेचरों की स्थिति । त्रिसप्ततिस्थानक समवाय हरिवास - रम्यकवास की जीवाएँ, विजय बलदेव की सिद्धि । चतुःसप्ततिस्थानक समवाय अग्निभूति की आयु, सीतोदा तथा सीता महानदी, नारकावास । पञ्चसप्ततिस्थानक समवाय सुविधि जिन के केवली, शीतल और शान्तिनाथ का गृहवास । षटसप्ततिस्थानक समवाय विद्युत्कुमार आदि भवनपतियों का आवास । सप्तसप्ततिस्थानक समवाय भरत चक्रवर्ती, अंगवंश के राजाओं की प्रव्रज्या, गर्दतोय तुषित लोकान्तिकों का परिवार, मुहूर्त का परिमाण । अष्टसप्ततिस्थानक समवाय वैश्रमण लोकपाल, स्थविर अकंपित, सूर्य-संचार से दिन रात्रि के वृद्धि ह्रास का नियम । एकोनाशीतिस्थानक समवाय रत्नप्रभा पृथ्वी से वलयामुख पाताल का तथा अन्य पातालों का अन्तर, छठी पृथ्वी और घनोदधि का अन्तर, जम्बूद्वीप के एक द्वार से दूसरे द्वार का अन्तर । अशीतिस्थानक समवाय श्रेयांस जिन की अवगाहना, त्रिपृष्ठ वासुदेव की अवगाहना, अचल बलदेव की अवगाहना, त्रिपृष्ठ वासुदेव का राजकाल, अप्-बहुल काण्ड की मोटाई, ईशानेन्द्र के सामानिक देव जम्बूद्वीप में प्रथम मंडल में सूर्योदय । एकाशीतिस्थानक समवाय भिक्षुप्रतिमा, कुन्थु जिन के मनः पर्यवज्ञानी, व्याख्याप्रज्ञप्ति के महायुग्मशत । द्वि-अशीतिस्थानक समवाय सूर्य - संचार, भ. महावीर का गर्भापहरण, महाहिमवन्त एवं रुक्मि पर्वत के सौगंधिक काण्ड का अन्तर । १२९ [११३] १३३ १३३ - १३४ १३४ १३४ १३५ १३६ १३७ १३७ १३८
SR No.003441
Book TitleAgam 04 Ang 04 Samvayanga Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Hiralal Shastri
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1991
Total Pages379
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Metaphysics, & agam_samvayang
File Size24 MB
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