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________________ १७ १. कृष्ण लेश्या ३. कापोत लेश्या ५. पद्म लेश्य | बोल सत्तरहवाँ लेश्या छह २. नील लेश्या ४. तेजो लेश्या ६. शुक्ल लेश्या व्याख्या जीव के शुभाशुभ परिणाम को लेश्या कहते हैं । अथवा जिस परिणाम से कर्मों का आत्मा के साथ सम्बन्ध हो, उसे लेश्या कहते हैं । लेश्या के दो भेद हैं-भाव और द्रव्य । भाव लेश्या विचार रूप और द्रव्य लेश्या पुद्गल रूप होती है । Jain Education International अथवा लेश्या के दो भेद हैं-धर्म लेश्या और अधर्म लेश्या । पहले की तीन अधर्म लेश्या और अगली तीन धर्म लेश्या हैं । इनको क्रमशः अशुभ लेश्या और शुभ लेश्या भी कहते हैं । कृष्ण लेश्या अतिरौद्रः सदा क्रोधी, मत्सरी धर्म - वर्जितः । निर्दयो वैर - संयुक्तः, कृष्ण - लेश्याऽधिको नरः ॥ कृष्ण लेश्या वाले जीव के विचार अत्यन्त क्रूर होते ( ६६ ) For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003421
Book TitlePacchis Bol
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijaymuni Shastri
PublisherSanmati Gyan Pith Agra
Publication Year1996
Total Pages102
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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