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________________ पाणिनीय-अष्टाध्यायी-प्रवचनम् सिद्धि-(१) काच्छ: । कच्छ+ङि+अण् । काच्छ्+अ । काच्छ+सु । काच्छः । यहां सप्तमी-समर्थ, देशवाची 'कच्छ' शब्द से शेष अर्थों में इस सूत्र से 'अण्' प्रत्यय है। 'तद्धितेष्वचामादे:' ( ७ । २ । ११७) से अंग को आदिवृद्धि होती है। २६४ (२) सैन्धवः | यहां 'सिन्धु' शब्द से पूर्ववत् 'अण्' प्रत्यय है। 'ओर्गुण:' ( ६ । ४ । १४६ ) से अंग को गुण होता है। ऐसे ही - वार्णवः । विशेष- (१) कच्छ-सिन्ध के ठीक दक्षिण में कच्छ जनपद है। (२) सिन्धु - सिन्धु नद के पूर्व में सिन्ध सागर दुआब का पुराना नाम सिन्धु था। (३) वर्णु - सिन्धु की पश्चिमी सहायक नदी कुर्रम के किनारे निचले हिस्से में बन्नू की दून है। इसका वैदिक नाम 'क्रम' था। इसका ऊपरी पहाड़ी प्रदेश आज भी 'कुर्रम' कहलाता है और निचला मैदानी भाग बन्नू । पाणिनि ने इसी को वर्णु नद के नाम से प्रसिद्ध वर्णु देश कहा है (पाणिनिकालीन भारतवर्ष पृ० ६६, ५०, ५१) । वुञ् - (४३) मनुष्यतत्स्थयोर्वुञ् । १३३ । - मुनष्य - तत्स्थयोः ७ । २ वुञ् १ ।१ । सo - तस्मिन् तिष्ठतीति तत्स्थम् । मनुष्यश्च तत्स्थं च ते मनुष्यतत्स्थे, तयो:- मनुष्यतत्स्थयोः (इतरेतरयोगद्वन्द्वः) । प०वि० अनु०-शेषे, देशे, कच्छादिभ्य इति चानुवर्तते । - अन्वयः - यथासम्भव० देशे कच्छादिभ्यः शेषे वुञ् मनुष्यतत्स्थयोः । अर्थ:-यथासम्भवविभक्तिसमर्थेभ्यो देशवाचिभ्यः कच्छादिभ्यः प्रातिपदिकेभ्यः शेषेष्वर्थेषु वुञ् प्रत्ययो भवति, मनुष्ये तत्स्थे चाभिधेये । उदा०-(मनुष्ये) कच्छे जात: काच्छको मनुष्यः । ( तत्स्थे) कच्छे जातं काच्छकम्। काच्छकमस्य हसितम् काच्छकमस्य जल्पितम् । काच्छिका चूडा । (मनुष्ये) सिन्धौ जातः सैन्धवको मनुष्यः । ( तत्स्थे) सिन्धौ जातं सैन्धवकम् । सैन्धवकमस्य हसितम्, सैन्धवकमस्य जल्पितम् । सैन्धविका चूडा। आर्यभाषाः अर्थ-यथासम्भव-विभक्ति-समर्थ (देशे ) देशवाची ( कच्छादिभ्यः ) कच्छ आदि प्रातिपदिकों से (शेषे) शेष अर्थों में (वुञ्) वुञ् प्रत्यय होता है (मनुष्यतत्स्थयोः) यदि वहां मनुष्य और मनुष्यस्थ क्रिया आदि अर्थ अभिधेय हो । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003298
Book TitlePaniniya Ashtadhyayi Pravachanam Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSudarshanacharya
PublisherBramharshi Swami Virjanand Arsh Dharmarth Nyas Zajjar
Publication Year1998
Total Pages624
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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