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रोने से सेठ की नींद हराम होती थी। जब वह मर गया तो उसकी जानकारी की। तब पता लगा कि यह तो मेरा ही पुत्र है। तब सेठ को कष्ट की अनुभूति होने लगी। कष्ट कहां से आया? अनुभूति में से। कष्ट की परिस्थिति अलग होती है और कष्ट की अनुभूति अलग होती है। धार्मिक को कष्ट की परिस्थिति आने पर भी अनुभूति नहीं होती। धर्म की चेतना विकसित होती है तो व्यक्ति कष्ट से अलिप्त रह सकता है, फिर वह चाहे धन का वियोग हो अथवा शारीरिक बीमारी हो
१८ में धर्म के सूत्र Jain Education International
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