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अभिव्यक्ति वह शक्ति किस कामकी जिसकी अभिव्यक्ति न हो। सूर्य और तपे हुए पथिकके बोच वही बोज शान्तिपूर्ण मध्यस्थता कर सकता है जिसकी अभिव्यक्ति हो गयी हो, जो वृक्ष बन गया हो।
अनुभूतिका तारतम्य जहाँ साध्यकी पूत्तिके लिए कष्ट सहा जाता है, वहाँ आनन्दको अनुभूति होती है ! कष्टको अनुभूति वहाँ होतो है, जहाँ वह साध्यको पूत्तिके लिए नहीं सहा जाता।
भावं और अनुभाव
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