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________________ गोचरी प्रकरण १२१ प्रश्न ३० वर्षा, ओस या अधिक त्रस जीव बरसते समय साधु विहार एवं गोचरी क्यों नहीं कर सकते हैं? उत्तर - क्योंकि इससे त्रस स्थावर जीवों की विराधना होने की संभावना रहती है । " प्रश्न ३१. प्रहर किसे कहते हैं ? उत्तर- दिन और रात का चौथाई भाग प्रहर होता है। दिन-रात के घटने बढ़ने के साथ प्रहर का समय भी घटता बढ़ता रहता है। प्रश्न ३२. साधु-साध्वी गोचरी करने के लिए जाए और रास्ते में वर्षा आ जाए तो क्या आगे जा सकते हैं ? उत्तर - नहीं जा सकते लेकिन रास्ते में कहीं ठहरने का स्थान न हो तो आगे जा सकते है या अपने स्थान पर वापिस आ सकते है । शास्त्रों में बारह कुल की गोरी कही है जैसे १. उग्रकुल - आरक्षक कुल । २. भोगकुल- राजा के पूज्यस्थानीय कुल । ३. राजन्यकुल- राजा के मित्र स्थानीय कुल । ४. क्षत्रियकुल- राष्ट्रकूटादि (राठौड़ आदि) कुल । ५. इक्ष्वाकुकुल- ऋषभ देव भगवान के वंशज । ६. हरिवंशकुल - अरिष्टनेमि भगवान के वंशज । ७. ग्वालादिका कुल । ८. वैश्य (वणिक) कुल । ६. नापित कुल । १०. सुथार कुल । ११. ग्राम रक्षक कुल । १२. तन्तुवाय (वस्त्रादि बुनने वाले) कुल । इन बारह कुलों से मिलते-जुलते वे सभी कुलों में गोचरी जा सकते हैं। प्रश्न ३३. क्या साधु अकेली स्त्री तथा साध्वी अकेले भाई से गोचरी ले सकते हैं ? १. दसवे. ५/१/८ २. उत्तरा २७/१२ Jain Education International ३. आ. श्रु. २ अ. १३.२/२३ For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003051
Book TitleSadhwachar ke Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRajnishkumarmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages184
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size6 MB
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