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________________ 55555555555555555555hhhhhhhhhhhhhh5 श्राविकाएँ स्थूल अदत्तादान के त्यागी होते हैं। जिस वस्तु को ग्रहण करना लोक में चोरी कहा जाता है और जिसके लिए शासन की ओर से दण्डविधान है. ऐसी वस्त के अदत्त ग्रहण को स्थल अदत्तादान कहा जाता है। कालविसमसंसियं-अदत्तादान करने वाले व्यक्ति प्रायः विषम काल और विषम देश का सहारा लेते हैं। अर्थात् रात्रि में जब लोग निद्राधीन हो जाते हैं तब अनुकूल अवसर समझकर चोर अपने काम में प्रवृत्त होते हैं और चोरी करने के पश्चात् गुफा, बीहड़ जंगल, पहाड़ आदि विषम स्थानों में छिप जाते हैं, जिससे उनका पता न लग सके। आगम वचन है-अहोऽ छिन्नतण्ह पत्थाण पत्थो इमइयं धनादि की तीव्र तृष्णा, जो कभी शान्त नहीं होती, ऐसी कलुषित बुद्धि से प्रेरित होकर मनुष्य चौर्य-कर्म में प्रवृत्त होता है। चोर की सर्वत्र ऐसी अपकीर्ति होती है कि उसे कहीं भी प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं होती। उस पर कोई विश्वास नहीं करता। चोरी स्पष्टतः अनार्य अर्थात् नीच कर्म है। चोरी करने वाला जाति या कुल आदि की अपेक्षा से भले आर्य हों परन्तु कर्म से अनार्य हैं। इसी कारण सत्पुरुषों द्वारा यह गर्हित-निन्दित है। अदत्तादान के कारण प्रियजनों एवं मित्रों में भी भेद-फूट उत्पन्न हो जाती है। मित्र शत्रु बन जाते हैं। प्रेमी भी विरोधी हो जाते हैं। इसकी बदौलत भयंकर नरसंहारकारी संग्राम होते हैं, लड़ाई-झगड़ा होता है। चौर्य कर्म में लिप्त मनुष्य वर्तमान जीवन को ही अनेक दुःखों से परिपूर्ण नहीं बनाता, अपितु भावी जीवन को भी विविध वेदनाओं से परिपूर्ण बना लेता है एवं जन्म-मरण रूप संसार की वृद्धि करता है। Elaboration-Adattadan is to usurp a thing that belongs to some one other than self without the permission of its owner or without his knowledge. ___In the scriptures, four types of stealing (adatt) have been mentioned (1) Swami adatt-stealing a thing of its owner, (2) Jiva adatt-stealing the life or limbs of a Jiva, (3) Guru adatt--stealing from or misinterpreting the teacher, and (4) Tirthankar adatt-declaring a thing as said by omniscient which is not so or misinterpreting the words of omniscient. Each of the said four, has four kinds namely Dravya (according to substance), Kshetra (according to location), Kaal (according to time) and Bhava (according to mental attitude). Thus adatt is of sixteen types. An ascetic observing five great vows avoids all types of stealing (adatt). He does not accept anything without the express permission of its owner. Among the householders, Shravaks and Shravikas (the householders who have accepted the vows of a householder devotees), avoid gross stealing. Gross adatt (stealing) is that which is considered theft in the world and for which there is criminal procedure for awarding punishment. श्रु.१, तृतीय अध्ययन : अदत्तादान आश्रय ( 125 ) Sh.1, Third Chapter: Stealing Aasrava 15555555555555555555555555 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002907
Book TitleAgam 10 Ang 10 Prashna Vyakaran Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni, Varunmuni, Sanjay Surana
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2008
Total Pages576
LanguageHindi, English
ClassificationBook_Devnagari, Book_English, Agam, Canon, Conduct, & agam_prashnavyakaran
File Size19 MB
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