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________________ इरहहिवसहहिंदीवातरहि स्लिमिलहि सारंगमादेहि तगिरिद्धिमहद्रिसिहिंजममहालास भरिदासमुसामारुमबखाश्साणणासकामनधिखामाहिं मुद्दाहिंसामाहिलादंदवनादि Jitdall णवणलिणणखणहिं खणधुलिनहारादि पसरियविदारहिंधयरहगामिणिदिसाहतकामिपिहिी। गयणावष्टताहि सरसंण्डतादि वातव सहि कार्लतखुजहिं वाहरविवहिं दुर्वतमलहि क्डविदा गजों, बैलों, चमकती हुई आँखोंवाले रीछों, मत्स्यों, सारंगों, सिंहों, वृक्षों, पहाड़ों और मेघों पर सवार होकर विकारों से युक्त, हंस की तरह चलनेवाली, आकाश से उतरती हुई सरस नृत्य करती हुई सुन्दर रमणियों अग्नि, महाभयंकर यम, नैऋत्य, वरुण (समुद्रेश), मारुत, कुबेर और शंकाहीन ईशान आदि देव आये। मध्य तथा बजते हुए वाद्यों, क्रीड़ा करते हुए वामनों, बाहुओं से शब्द करते आते हुए मल्लों, बहुविधविलासों में क्षीण, मुग्धा, पूर्णचन्द्रमुखी, नव-कमलों के समान आँखोंवाली, स्तनों पर हिलते हारोंवाली, प्रसरणशील Jain Education International For Private & Personal use only www.jainelibrary.org
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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