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________________ वराहामुणुकहरसाडयवलसाड उद्यवयमालापंचवमाकयासिजम्मनपरमिप्रथम वाणिवरणक बजणिपत्नुपणशणहमुदलदमागच बहिणिदिविवाङकिश्वर्णण सासिठमाययतासाथ पण वचविचामाटारुणियउसबातातहिवितापतगहिउद मुनमायाकउपक्चराऊवणेमकडूमा एसमतदक नायारिणिसुपिनियनयान सुपहियापहसारपाल होंडविलोलतनाम दियदेवि नवररामाहिराम पारस्तितिषहरू पळिवणकारावकपणकरावाणगछता जपतरायहरु सम्राट बारगजुगलव रु लविवहश्परुिपरियणु हनिसिहअहिंसहस नजघराजाभाग शिताहिकंडठपहचतोलेप्पिणञ्चलकर श्चारिजातवाव लावनि। यलचलाए परियाणणिवाणिवरकलाए हठचा मायररिया वाहिमिपिंडहिंसमारियाले कश्व यठणकणविसावियाउ लकणियसवणहाणवा वियान कम्मरकंदिणसरसुसाञ्जखडविताएँ पनिकरश्चचा श्यागहिर करमुकरविग? अप्पाही दिणमाहवसणसद्ध घरतणउघवप्पिणवियसिदासु गमगातहप्तणुरुहहेपा रानापनमियण अत्यन्त साधु वह साधु पुनः कथन करते हैं कि उड़ती हुई पचरंगी ध्वजमालाओंबाले धान्यपुर नगर में यह बन्दर पूर्वजन्म में, वणिग्वर कुबेर से उत्पन्न प्रणयिनी सुदत्ता का नागदत्त नाम का पुत्र था। माता ने कहा कि बहन का विवाह धन से किया जाता है परन्तु इसने समस्त सोना ठगकर ले लिया, तब उसने (माँ ने) भी उससे सब धन छीन लिया। वह मायावी पुत्र यहाँ इस वन में मनुष्यमात्र के समान देहवाला वानर हुआ है। हे राजन् ! सुनो, यह नेवला पूर्वकाल में तोरणों से युक्त सुप्रतिष्ठितनगर में लोलुप नाम का हलवाई था। हे वज्रजंध, कुछ दिनों में राजा ने एक जिनमन्दिर कारीगर से बनवाना प्रारम्भ किया। ____घत्ता-वहाँ पुराना राजघर था; वहाँ से लकड़ी लेकर पुरजन नगर ले जाते । जहाँ पर एक ईंट फूटी थी, वहाँ हलवाई अचानक सोना देखता है ॥१९॥ जिसमें करतल और तराजू चंचल है ऐसी वणिकवर की कला से, जानबूझकर स्वर्ण से पूरित ईंटें तोलकर बाहर मिट्टी के पिण्डों से उन्हें ढक दिया। किसी ने भी किसी प्रकार इसे नहीं जाना। वह शीघ्र उन्हें अपने घर उठवा ले गया। काम करनेवाले को उसने सरस भोजन दिया। लोभी व्यक्ति भी दान से काम कर लेता है। यह गूढ़ और निन्दनीय काम कर दूसरे दिन वह मूर्ख मोह के वश से, प्रसन्नमुख अपने पुत्र को घर में रखकर दूसरे गाँव पुत्री के पास गया। यहाँ पर पिता की आज्ञा से खण्डित पुत्र ने www.jainelibrary.org Jain Education Internation For Private & Personal Use Only
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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