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________________ अयअगरी करकरणपणयकजा मतपणवाणफिट तप्या स्याउंजपरी कराकरणरणाहहोकरी पणवङकिंवदयापलावें मुगलनशमिछागावें संणि सुणविक्रमागणघासतपणवळजवाहिदासश्तयणवङजसथिरुकलयातश्पण वडजजीविडसंदरुतश्पणवहाजरणपश्तपणवजहिणलडतपणवङ्का इवलणाटपणवहनसहयाविडतपणवहजड़मयमुणफिशतश्यपवइजम्या। उपखहरूकंठेकर्यतपासणचढ़तश्यापवाशराहावशाधला जजम्मजरामाज्ञा चनगरकच्चारघतापणवहतासपरसोजसमारहातारा यारणाला पुणरावताद गाहटसवणमकरस गरिमय ग्राणायमधारपवरणकारण पणमिठजनामा पिडिए खमहिदहमणिण कियणविजमाणुमुपण बकलणिवरणकंदमंदिरु वणहललाय पर्वरिलंसंदरुवरिदालिहसरीरदादंडणु णदिपरिसहोयदिमाणविडए परपलस्यसरकिंका रसिरिअसहावाणणंपाउँससिरिदिरिणिवपटिहारदंडसंघकाविसकरपउरुलाहएको जायमुड़हलगालाकहासिठाकरासकालरपहचासालावाचाहन्नण पावरलदसपणि मणमठणजइसहखातराकायरूग्रडारपसायदपलाविरूधमुणियाहियथचारुगायतका लहसालुलगाइसहडन्ने मकरपयंपिरुचाअगार केत्रविषिणदोश्वाराधना अप्रतिक भय उत्पन्न करनेवाले राजा की सेवा करा और उन्हों प्रणाम करी, बहुत प्रलाप से क्या? मिथ्या गवसे धरती करने के लिए प्रणाम करना उचित नहीं है। शरीर खण्ड या धरती के खण्ड को महत्त्व देकर और मान छोड़कर प्राप्त नहीं की जा सकती।" यह सुनकर कुमारगण बोषित करता है-"हम तब प्रणाम करते हैं यदि उसमें ज्या प्रणाम किया जाये? वल्कलों का पहनना, गुफाओं का घर, और बनफलों का भोजन सुन्दर है। दारिद्रय कोई ब्याधि दिखाई नहीं देती। तब प्रणाम करते हैं यदि उसका शरीर पवित्र है। तब प्रणाम करते हैं यदि और शरीर का खण्डन अच्छा, परन्तु मनुष्य का अभिमान को खण्डित करना ठीक नहीं। किंकररूपी नदी उसका जीवन सन्दर है। तब प्रणाम करते हैं यदि वह जरा से क्षीण नहीं होता। तब प्रणाम करते हैं यदि वह दूसरों के पदरज से धूसरित है। पावस की श्री को धारण करनेवालो असुहावनी है राजाओं के प्रतिहारों के पोठ देकर नहीं भागता, तो प्रणाम करते हैं यदि उसका बल नष्ट नहीं होता. तो प्रणाम करते हैं यदि उसको दण्डों का संघर्षण और हाथ उर को स्पर्श करना कौन सहे? भौंहा से टेढ़ा मुख कौन देख कि वह प्रसन्न पवित्रता नष्ट नहीं होती, तो प्रणाम करते हैं यदि कामदेव नष्ट नहीं होता, तो प्रणाम करते हैं यदि काल समाप्त है या क्रोध से काला है, यदि राजा के निकट है तो वह ढाठपन को प्राप्त होता है, यदि कभी-कभी दर्शन नहीं होता, तो प्रणाम करते हैं यदि गले में यम नहीं लगता और ऋद्धि समाम नहीं होती। करता है तो स्नेहहीन समझा जाता है, मौन रहने से जड़ (मुखं) और शान्ति से रहने पर कायर, सोधा रहने घना-यदि वह जन्म जरा और मरण का अपहरण करता है. चार गतियों के दःख का निवारण करता। पर पशु और पण्डित होने पर पलाप करनेवाला अपने हृदय की सुन्दर गुरुता को न समझनेवाली शूरवीरता है और संसार से उद्धार करता है तो हम उस राजा को पणाम करते हैं।"॥७॥ से कलहशील कहा जाता है और मोठा बोलने पर चापलुस । इस प्रकार सेवा में रत व्यक्ति किसी भी प्रकार गुणी नहीं होता। उन्होंने और भी गम्भीर कानों के लिए मधुर इस प्रकार कहा कि धरता के लिए और आज्ञा का प्रसार. घत्ता- अत्यन्त तीख Jain Education International For Private & Personal use only wwww.jainelibrary.org
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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