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जायकवति कउसन्यासुह देवपर्वतनाप्नु लिषहरियो वति।
पविसरमणापानरासहिमा कयचलणासिकमसमणी पसरियनुलया वणसरकुलयादि वह
अत्यन्त सुन्दरी स्थूल स्तनोंवाली, कमलों के समान चरणवाली, सिर में फूल गूंथनेवाली, प्रसरित पुलकवाली, व्यन्तरकुल में उत्पन्न हुई,
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