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________________ वारकोलाहल मिचिमसमरगोंदलाना उगलगलतचोथ्यमयंगपयरिलारसारिजमापक पवियूपाश्रमकसकाररावधार जलिदिदिलतवाहियवसाखरखररक्यावणाचालिमहाल पासततियसतरूणाविचित्रघोलतचलचिनीजहणुहप्परगतपक्कलपढपाकमुकलना कहकरियडविडणघहरोलरतगयणलायजरदियमकपणहविससरंगताहरसाचा लणवडियगुरुसिहरिसिंहरसयतापजायचंदाचदणाहजहारदोस्करकडयकचाकला चमडावलविमदारदाममोगलरकारकाविमाणलमजलाचखदाढाकरालचकारणगामिया मडालयमूरसामतकासकरवालवावसंघाटसकदिल जेदलिदाणधारपवादपसमतदार संतदमदिनाणासरंतरणापरुद्दरिदविविन्नधि विदेहपस्थिलियसयणीसंदर्षिड हाफेणसलिलविरिफलतलखणतसयडसंक्किमवहिणिसाचा तपत्रिपनल महरिभव लवानिजमानकुलसहि पवाहिकासरगाढवलमरण रिवाश्यचमकमिपासाहिविज्ञा गरे रिदरिमरिशहाजालंघन पद्धसामन्चत साधलारिसहिकिजियाणिक्रिमदहदिहतनामाव। कालदरवेणणिव हाझापलयकालसंधान वयाणसुणविधाकाविलालाही मेहमहामर ३ वीरों में कोलाहल होने लगा, युद्ध की भिड़न्त चाही जाने लगी। चिंघाड़ते हुए और चलाये जाते हुए हाथियों जाने पर, दिखाई पड़नेवाले दसों दिशाओं के मुखों को भरते हुए सैनिक नरों द्वारा विविध छत्रचिह्न उठा लिये के पैरों के भूरिभार के दबाव से उत्पन्न भूकम्प से नमित नागराजों के द्वारा मुक्त फूत्कार शब्दों से जो भयंकर गये हैं। जहाँ अनुचरों के शरीर से परिगलित स्वेद निर्झर की बूंदों और अश्वों के फेन-जलों से गीले तलभाग हो उठा है। हिनहिनाते हुए और चलाये गये घोड़ों के तीखे खुरों से खोदी गयी धरती से उठी हुई धूल से में गड़ते (खचते हुए) शकटों से मार्गप्रदेश संकीर्ण हो चुका है। नष्ट होती हुई देवांगनाओं के वस्त्र और चित्र विचित्र हो रहे हैं। मारो-मारो कहते हुए समर्थ और प्रौढ़ पैदल पत्ता-(ऐसी) उस प्रबल सेना को आक्रमण करते हुए देखकर म्लेच्छकुल के राजाओं ने कहा-“अब सेना के द्वारा मुक्त भयंकर हुंकारों से शत्रुसुभटों के विघटन से उठे हुए शब्दों से आकाशमार्ग विदीर्ण हो गया कौन शरण है, मरण आ पहुँचा है, चारों ओर शत्रु दौड़ रहा है॥७॥ है। रथिकों द्वारा छोड़ी गयी विशेष लगाम से चलते हुए रथों से डगमगाती हुई धरती पर गिरे हुए पहाड़ों के शिखरों से चन्द्रमा और रक्त चन्दन-वृक्षों का समूह चूर्ण-चूर्ण हो गया है। हार-दोर-केयूर-कटक- जो सामर्थ्यवान् राजा गिरिघाटियों और नदियों के मुखों का उल्लंघन करता है, दसों दिग्गजों को करधनी-कलाप और मुकुटों पर अबलम्बित मन्दार मालाओं से शोभित यक्ष तथा यक्षिणियों के विमानों से जीतनेवाला है, ऐसा राजा हम-जैसे लोगों से कैसे जीता जा सकता है? हा-हा, बहुत समय के बाद दैव से जो आच्छादित है; जो श्रेष्ठ आराओं से कराल चक्रों का अनुगमन करते हुए माण्डलीक सूर सामन्त भालों, निवेदित प्रलयकाल आ पहुँचा।" इस प्रकार म्लेच्छ महामण्डल के अधिराजों, आवर्त तथा किलातों के वचन तलवारों और चाप समूह से संकीर्ण और भयंकर है। गजों के मदजल के धाराप्रवाह से धूल के शान्त हो सुनकर Jain Education Internations For Private & Personal use only www.jan 269org
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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