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________________ "खालसहिन तालाल पहरतान सहिन डगमडेकयमहरु रखा सोया सोयधरु, केव वणवेत पण माय परे मायति ससिरा सिसिरी सबसा दियन वडसे Jain Education International तालवृक्षों के घर में तूर्यों के तालों से महनीय था, ऊँची अटवी में वह बलात्कार करनेवाला था, रक्ताशोक वृक्ष की गोद में अशोक को धारण कर रहा था। चम्पक वृक्षों में वह स्वर्ण से युक्त था। पुन्नागप्रबर में श्रेष्ठ चरितवाला था। शिरीष वृक्षों में शिरीष (मुकुट) से प्रसादित था। अनेक वंशावृक्षों में जो नृवंशों से विराजित णिवंसविश्न संविय सुवे सेवसासवणु सतुमंगयल मिस मंगगए सिहिगलवेमं १२३ विजयंतियन्तु। था, अपने सुन्दर रूप में स्थित वह वेश्याभवन के समान था, भुजंग वृक्षों से सहित होने पर उसमें लम्पट घूम रहे थे, मयूरों के सुन्दर शब्दों में For Private & Personal Use Only 245/-org
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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