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________________ गगसड्सशाणइकंतिपायाफुचकाउँ गाउथिनश्कवण्याहिराठश्रदोहोकिममस्या याणहाही वणनेकदवाणिसाश्याहामुणोपहर्षक्तिवजदाजाही मगाहोरिरहोपि काहाणकाही शकताकवणमाविणार साहूलपचाणणाणपिताना जहाजालारा सपाराहसोहाघुलतगसप्योदडाणकोदो मणममणिभोणियारीणिसुहा मोदेवदेवापर आश्वही श्मसरियाचारधारावहारो यरंडवहाधारुचारित्रमाणिधवलाअञ्यश उलवलेंडरकरदिणिसिनरतहिकसरहि विज्ञपिटरससिरदिपकुविपक्षणविदिलठ याचला ननियधवलविद्यमहिमावसार रिकरिवरहणपल्लागासाठे परजम्न वरविपरित पियसहिरासहाणकहहोणेदालालागयगडचंडकडवण्वाहा को वियहाकडिदाढावलेहा कोविसहमणिमुहवियाइताणवियकहालदियाइका विसश्सहदसमसदा यासिटाकसामइवारविसया को विसईयागातणणिरामणि पिरसगिरिडगचास पळसजलधाराविपियाकाविसहविडझडाण्याशका विसहरसिसिरपडनसिसिकाउण्टालदिण्यरकिरणपसरूपरलायकहाणकिणदिह स्पष्ट ही वह वज्र शरीर हैं, उनके पैर नहीं दुखते। राजाधिराज वह कुछ भी उन्मार्जन नहीं करते। अरे, इससे इसका क्या होगा? वन में हम किस प्रकार दिन-रात बितायें? फिर ये नगर जायेंगे या नहीं जायेंगे? सुन्दर जिसने ऊँचे उठे हुए धवल ध्वजों की महिमा को हटा दिया है, दूसरे जन्म में जिसका प्रभाव विख्यात राज्य करेंगे या नहीं करेंगे? न तो कान्ता और कुटुम्ब के द्वारा उनमें मोह उत्पन्न होता है, और न वह सिंह है, ऐसा श्रेष्ठ हाथियों के समूह के स्वामी का पर्याणभार, हे प्रियसखी ! क्या रासभों के द्वारा ले जाया जा सकता तथा पंचानन से डरते हैं? वह ऐसे वटवृक्ष की तरह दिखाई देते हैं जो जटारूपी जाल धारण करता है, अपने है? कोई हाथियों के द्वारा कान और गण्डस्थल खुजाये जाने की बाधा सहन करता है। कोई सूअरों के दाढ़ों प्रारोहों से शोभित है, और जिसके शरीर पर सर्प व्याप्त है। मनुओं के द्वारा पूज्य, मनुष्यों के निर्माता मनुष्यश्रेष्ठ से विदीर्ण होने की बाधा सहन करता है, कोई नागमुखों से चूमा जाने और उनके गले में लपटने को सहन यह देवदेव आदि ब्रह्मा हैं। धैर्यधीरों के भी धैर्य का अपहरण करनेवाला इनका ऐसा अत्यन्त दुर्वह सुन्दर करता है, कोई असह्य डाँस और मच्छर को सहन करता है, कोई कषायों का पोषण करनेवाली दुरि विषयों चारित्रभार है।" को सहन करता है। कोई विवश होकर नग्नत्व को सहन करता है, कोई नित्य निराहार रहना और गिरिदुर्ग पत्ता-जहाँ अत्यन्त अतुल बलवाले धवल (बैल) ने अपने खुरों से दुर्ग को खोद डाला, वहाँ गरियाल में रहना सहन करता है। कोई पावस जलधाराओं की अप्रिय बिजलियों की झपटों को सहन करता है। कोई बैल एक भी पैर नहीं रख सके ॥२॥ शीतकाल में होनेवाली ठण्ड सहन करता है। उष्णकाल में सूर्य के किरण प्रसार को सहन करता है। परलोक की कहानी किसने देखी? For Private & Personal use only www.jainelibrary.org Jain Education Internations
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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