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________________ रायणिवहायिलहर सहयपोजणेसावइससहाउणपकरापुडकखशजाउमहावड्याब शाखडयाचिउकसायरसरासयल मिलारजमिवासण्ठाणाणाजम्माधियारणवाहिश्ससार शाळा या हिंडणापत्य पायनियरिहरसवितश्याई तिखुतिलळिधिविदिसहिवि हाध्ठ कवलिब्घाणठवणि विणिया घाखारपचारिखनलिविज्ञातरलतखारिवियारि। उपकवड्यतिहिंधारसिट खलिउहलिउपसमलिउनिसहिमानहामिडसामिडपापिठास। लिकॉतदतेसकामिठे असोडिअमोडिटमाहियाडिन विरसमाणुकखनर्दिफाडिमा हरिमनकसहि। विहिम कदोहहलेमुसलेला सहिदिलिजलिहियालिन जलियजलणालिलिहिमालि उसम्प्रविहरणेण्डवालिट सेंबल्लियावदिसल्लिम सकुंडिमाजिविघलिय रुधिरोहलिमदा अपल्लिघता मयारासुधरवद रगपहरसादलपानुविवि सुकपछिप्तमधहाणारयम दहाणामणिमालपमेञ्चुविशाखेडया सिंगास्यपकासवादाढीमुदागरकासुमा सुजतासवसंग मणिलहाजावाणिग्रमाला कायककाश्लकारंडहिासारसचासलासतरंडहिंसाहसम्हसूअसा हरहिंाधारमारमंडलमहारहि कारखरखजरसारंगाहालाययपाराधयादिगाहाकुकुरमचड विहिपाठ काटबालि सब्सलियावालगाशीवविष्टनावाखाणकाममा सुजेताजन घत्ता-राग के द्वारा बाँधा गया इन्द्रियों से लुब्ध सुख भी मुझे अन्य प्रतीत होता है। अपने स्वभाव को हुआ करपत्रों (आरों) से फाड़ा जाता। भालों से विदारित टुकड़े-टुकड़े हो जाता। बड़े-बड़े ऊखलों में मूसलों नहीं देखता, दूसरे की आकांक्षा करता है इस प्रकार जीव महा आपत्ति पाता है ॥४॥ से कूटा जाता। शक्तियों से पिरोया गया और यन्त्रों से पीड़ित किया जाता। जलती हुई आग की ज्वालाओं से जलाया जाता, मर्मभेदी अपशब्दों से बोला जाता, सेल, भालों और लौह-अंकुशों से छेदा जाता, पीप कुण्ड में ढकेल दिया जाता, रक्त से शरीर नहा जाता। चार कषायरूपी रस में आसक्त और मिथ्या संयम के वशीभूत होकर (यह जीव) नाना जन्मोंवाले संसार घत्ता-इस प्रकार मन में क्रोध धारण करते हुए और युद्ध में प्रहार करते हुए उसका खण्डित शरीर में घूमता है। जब वह नरकगति में उत्पन्न होता है, तब नारकीय समूह के द्वारा अवरुद्ध होकर तिल-तिल होकर भी जा लगता है। इस प्रकार तम से अन्धे नारकीय समूह में पलमात्र का भी सुख नहीं है ॥५॥ टुकड़े कर दिशाओं में विभक्त कर दिया जाता है। खाया, धुना, घायल किया और गिराया जाता है। बारबार पुकारा जाता और भर्त्सित किया जाता। विद्युत की तरह चंचल तलवारों से विदारित किया जाता। अकेला शृंगधारी पशुओं-पक्षियों, दाढ़वाले और नखवाले पशुओं में संसार के संगम को भोगता हुआ यह जीव ही बहुतों के द्वारा आक्रान्त, स्खलित, दलित, पदमर्दित और फेंका जाता है। नीचे किया जाता, घुमाया जाता, निकल नहीं पाता। कौआ, बगुला, कोयल, चक्रवाक, सारस, चारभास, भैरुण्ड, सिंह, शरभ, सुअर, सालूर, झुकाया जाता, शूली में और यम के दाँतों में। पछाड़ा और मोड़ा गया, धरती पर गिर पड़ता है। चिल्लाता घार, मोर, मण्डल, मार्जार (बिलाव), कीर, कुरर, कुंजर, सारंग, लावा, पारावत, तुरंग, मुर्गा, वानर, Jain Education Internation For Private & Personal use only
SR No.002738
Book TitleAdi Purana
Original Sutra AuthorPushpadant
Author
PublisherJain Vidyasansthan Rajasthan
Publication Year2004
Total Pages712
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size147 MB
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