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________________ अपभ्रंश में पुल्लिंग, नपुंसकलिंग व स्त्रीलिंग में अस्मद् ग्रम्ह से परे भिस् (तृतीया बहुवचन का प्रत्यय) सहित श्रम्हहिं होता है । म्ह (पु, नपुं., स्त्री . ) (श्रम्ह + मिस् ) = श्रम् हेहि (तृतीया बहुवचन) 50. महु मज्झ ङसिङस्भ्याम् 4/379 महु (महु) 1 / 1 मज्भु (मज्भु) 1 / 1 [ ( ङसि ) - ( ङस् ) 3/2] (अस्मद् श्रह से परे ) ङसि और ङस् सहित महु और मज्भु (होते हैं) । अपभ्रंश में पुल्लिंग, नपुंसकलिंग व स्त्रीलिंग में अस्मद् ग्रम्ह से परे ङसि (पंचमी एकवचन का प्रत्यय) और ङस् (षष्ठी एकवचन का प्रत्यय) सहित महु और मज्भु होते हैं । श्रम्ह (पु., नपुं., स्त्री.) ( श्रम्ह + ङसि ) = महु और मज्भु (पंचमी एकवचन ) ( ह + ङस् ) = महु और मज्भु (षष्ठी एकवचन) 51. ब्रम्हहं भ्याम्भ्याम् अहं [ ( भ्यस् ) + (आम्भ्याम्) ] म्हं (म्हं) 1 / 1 [ ( भ्यस् ) - ( श्राम् ) 3 / 2 ] (अस्मद् ग्रह से परे ) भ्यस् और श्राम् सहित श्रम्हहं (होता है) । अपभ्रंश में पुल्लिंग, नपुंसकलिंग व स्त्रीलिंग में अस्मद् ग्रम्ह से परे भ्यस् (पंचमी बहुवचन का प्रत्यय) तथा श्राम् (षष्ठी बहुवचन का प्रत्यय) सहित श्रम्हहं होता है । म्ह (पु., नपुं, स्त्री . ) - (ग्रम्ह + भ्यस् ) = श्रम्हहं (पंचमी बहुवचन) (अम्हे + आम् ) = ग्रम्हहं (षष्ठी बहुवचन) 52. सुपा श्रम्हासु 4/380 4/381 सुवा (सुप्) 3 / 1 अम्हासु ( म्हासु) 1 / 1 ( अस्मद् ब्रम्ह से परे ) सुप् सहित अम्हासु (होता है) । अपभ्रंश में पुल्लिंग, नपुंसकलिंग व स्त्रीलिंग में अस्मद् श्रम्ह से परे सुप् (सप्तमी बहुवचन का प्रत्यय) सहित भ्रम्हासु होता है । प्रौढ अपभ्रंश रचना सौरभ ] Jain Education International For Private & Personal Use Only [ 133 www.jainelibrary.org
SR No.002695
Book TitlePraudh Apbhramsa Rachna Saurabh Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamalchand Sogani
PublisherApbhramsa Sahitya Academy
Publication Year1997
Total Pages202
LanguageApbhramsa, Hindi
ClassificationBook_Devnagari & Grammar
File Size5 MB
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