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________________ ३९२ [ १७५३ नेमिनाहचरिउ [१७५३] एत्थ-अंतरि अमर-परिसाए सोहम्म-सुराहिवइ चंद-कंत-संमत्त-भाविउ । परिसाहइ तुट्ट-मणु भुवण नाह-गुण-गणिण गाविउ । वालु अ-वाल-प्पगइ गुरु- विक्कम वोर-कुमारु । खोहिउ सक्कु न एइ जइ इंदु वि स-परीवारु॥ [१७५४] ___ अह अ-सदहमाणु सुरु एगु तियसिंदह वयणु पहु- सविहि पवण-वेगिण पहुत्तउ । भयवं पि-हु सिमुहि सह अ-कय-संकु चिट्ठइ ललंतउ ।। ता जय-वंधवि तरु-सिहरि आरुढम्मि स-तोसु । तियसु सु पहु-भेसणह कइ पयडिय-कित्तिम-रोसु ॥ [१७५५] भुवण-पसरिय-घोर-फुक्कारु गुंजारुण-लोयणउ दीह-काउ अलि-गवल-सामलु । जम-य-सरिच्छु गुरु- जमल-जीहु विस-वेग-पिच्छलु || विवरिय-मुहु नीसेस-जय- कवलण-विहिहिं अ-चुक्कु । उप्फणु फणि तसु तरुहु थुड परिवेढेविणु थक्कु ॥ [१७५६] ता खणद्धिण मुक्क-पुक्कार गुरु-सासाउल-हियय नट्ट सयल-डिभई दिसो-दिस । भयवं पि-हु अ-क्खुहिउ उत्तरंतु विडविहि अहो-दिसि ॥ तसु तारिसह भुयंगमह सिरि विणिवेसिवि पाउ । परिवियसिय-वयणवुरुहु तक्खणि महियलि आउ ।। १७५५. १. क. सरिच्छ. ____Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002609
Book TitleNeminahacariya Part 1
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1970
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size16 MB
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