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________________ २९४ नैमिनाहचरिउ [११६९] इय विचिंतिर भणइ - नणु ताय परिवाग-दारुण विसय भवि हवंति जीवहं सहाविण । अवियढिण माणुसिण सह उ दुहई वियरवि विसेसिण ॥ इय अ-दिह विस-कंटगु व गरुय-दुहउ विसयड्डु । सिंग-विवज्जिउ दु-पउ पसु चइयघउ अवियड्दु ॥ [११७०] इय वहत्तरि-कल-वियारेण जो तुम्हहं पयडु मइं जिणइ मज्झ सु जि देज्ज पिययमु । इयरह किमणत्थ-फल- विसय-सुहिण ता लेसु संजमु ॥ इय निसुणिवि धूयह क्यणु निवु परितुटु मणेण । सहावइ सचिव-प्पवरु स-निउत्तेहिं खणेण ॥ [११७१] ता नराहिवु धूय-वुत्तंतु सचिविंदह कहइ अह तेण भणिउ - नणु देव जइ इहु । ता गरुयर-वित्थरिण विजिय-तियस-गिह-सोहु इह लहु । काउ सयंवर-मंडवउ सदावहु जय-सार । निरुवम-कित्ति-पयाव-भर सयलि वि निवइ-कुमार ॥ [११७२] अह सयंवर-मंडवु करेवि स-निउत्तय-माणविहिं उचिय-उचिय-निय-लेह पेसिवि । सव्वेसि वि निव-सुवहं पीइमइहि वइयरु पयासिवि ॥ सद्दाविय जियसत्तु . नरनाहिण तियस-विसेसु । परिसीलिवि ससि-निम्मलहं कलह कलावु अ-सेसु ॥ Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002609
Book TitleNeminahacariya Part 1
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1970
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size16 MB
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