SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 290
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ११०४] २७७ पंचमभवि अवराइयवृत्तंतु [११०१] तयणु एगिण खयर-कुमरेण ललियप्पिय-नामगिण भणिउ ईसि विहसिवि - सुहग्गिय । परमेसरि रइ दइय एह तुज्झ होइहइ चंगिय ॥ ईसि वियासिय मुह-कमल कुमरु भणइ - जइ एउ। ता कि न गुरु-भत्तिहिं महि जि नाराहइ पूएउ ॥ [११०२] तयणु विहसिवि ताल-रव-पुव्वु ललियप्पिउ वज्जरइ मन कुमार उत्तालु हविहसि । गुरु-भत्ति कुणंत रइ इह तुमं पि सयमेव पेक्खसि ॥ जमिह न भुक्खालुय-वसिण उंचर-तरु पच्चंति ।। न-वि हु छुहा-भर-पीडिय वि दुर्हि इथिहिं जेमंति ॥ [११०३] एत्थ-अंतरि अंव-धाईए सा वाल समुल्लविय एहि एहि तुहूं वच्छि वेगिण । हउं देविण पेसविय तुरिउ तुज्झ वाहरण-कज्जिण ॥ तुह संतियउ कलायरिउ चिट्ठइ भवणि पहुत्तु । वीणा-वायणु अज्जु तई काराविसइ निरुत्तु ।। [११०४] अह अणंगह विहिय वर-पूय सा वाल गिहाभिमुहु चलिय जाव ता विहि-निओइण । चउराणण-नामियहिं सहिहिं कुमरु सह मित्त-विंदिण ॥ दिट्ठउ अणिमिस लोयणिहिं कुमरिहि समुहु नियंतु । पेक्खि पेक्खि पहु सामि इय तयणंतरु विण्णत्तु ।। ११०१. ५. क. होइइह, ख. होइहई, ___Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002609
Book TitleNeminahacariya Part 1
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1970
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size16 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy