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________________ १५६ नेमिनाहचरिउ । [६१८ [६१८] धुय सुनंदा माम हउं अन्नदियहम्मि उ मह जणय- पयहं पुरउ संपत्त-मेत्तिण । एगयरिण दूयगिण नमिर-सिरिण विष्णत्तु जत्तिण ॥ जह - गयउर-नयर-प्पहुहु आससेण-निवइस्सु । निज्जिय-भुवण-नियंविणिहि सहदेविहि दइयस्सु । [६१९] अत्थि नंदणु भवण-अब्भहिय चक्काहिव-सिरि-तरुणि- रमणु अतणु-गुण-रयण सायरु । सोहग्गिय-सिरि-तिलउ रिउ-मरट्ट-घट्टण-कयायरु ॥ पुण्णिम-ससि व समग्गहं वि विमल-कलाहं निहाणु । रूविण जसिण जयब्भहिउ सणतुकुमारभिहाणु ॥ [६२०] इय सुणंदह जइ न संवंधु नर-रयणिण तेण सह हवइ विहिण ता नूण हारिउ । मह जणएण तयणु नणु जुत्तु एहु इय संपधारिउ ॥ आससेण-नरवइ-पुरउ स-वलिण गच्छंतेण । निय हउं सिरि-गयउर-नयरि हरिसु पयासंतेण ॥ अन्न-अवसरि सहिहिं परियरिय कंदप्प-पूयण-विहिण गइय आसि हउं नयर-काणणि । ता मयणह पयडह जि विहिय पूय मई हसिरि सहियणि ॥ तयणंतरु निय-घरि गइय केण-वि विहिहि वसेण । अइव-दुरंतिण उप्परिण हउं गहीय दोसेण ॥ ६१९. ३. अनणु. ६२१. १. वसरि. २. क. पूइण. ६२२. ३. क. कहकचि. Jain Education International 2010_05 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002609
Book TitleNeminahacariya Part 1
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
AuthorH C Bhayani, Madhusudan Modi
PublisherL D Indology Ahmedabad
Publication Year1970
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Literature
File Size16 MB
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