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________________ ९२ प्रमाणोपेत अंगोपांगवाले, विविध आभरणों से सुशोभित, रक्त वर्णवाले, नील वर्ण के वस्त्रवाले, मुकुट में कलश के चिह्न से शोभते हैं । अग्निकुमारेन्द्र अग्नि की एक ज्वाला से संपूर्ण जंबूद्वीप को जला सकता हैं । ६. वायुकुमार : ये देव तीर्थंकरो के विहार मार्ग को शुद्ध करते हैं । स्थिर, पुष्ट और गोल अवयववाले, उंडे पेटवाले, स्वच्छ और मगर की निशानीवाले होते हैं । सात हाथ ऊंचे ये वायुकुमार देव प्रियंगु वृक्ष के समान अवदात श्याम वर्णवाले, रक्तवर्ण के वस्त्रवाले, मुकुट में मगर के चिह्नवाले होते हैं । शक्ति की अपेक्षा से ये वायुकुमारेन्द्र पवन के एक गुंजारव से संपूर्ण जंबुद्वीप को हवा से भर सकते हैं । ७. स्तनितकुमार : शब्द करनेवाले देवों को स्तनितकुमार कहते हैं । स्नेहल, गंभीर, मधुर आवाज वाले, सराव के चिह्नवाले, सात हाथ ऊंचे ये स्तनितकुमार स्निग्ध शरीर की कांतिवाले, स्थिर, महास्वरवाले होते हैं । सुविशुद्ध जात्य सुवर्ण समान वर्णवाले, श्वेत वस्त्र से युक्त, मुकुट में वर्धमान या सराव के चिह्न से सुशोभित होते हैं । इनकी शक्ति इतनी होती है कि जो यदि इनका इन्द्र एक स्तनित (एक गर्जना करे तो सारे जंबूद्वीप को बहरा कर दे । ८. उदधिकुमार : समुद्रो में क्रीडा करनेवाले उदधिकुमार होते हैं । कमर और जंघा जिनकी अत्यंत सुंदर है, ऐसे घोड़े के चिह्न वाले उदधिकुमार श्वेत वर्ण के शरीरवाले, नील वर्ण के वस्त्रवाले होते हैं । शक्ति की अपेक्षा से ये देव एक ही पानी की लहर से सारे जंबूद्वीप को भगो सकते हैं । ९. द्वीपकुमार : द्वीप में क्रीड़ा करने से ये देव द्वीपकुमार कहलाते हैं । सात हाथ ऊँचे ये द्वीप कुमार स्कन्ध, वक्षःस्थल, बाहु और अग्रहस्त अधिक शोभायुक्त, तपे हुए Jain Education International 2010_03 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002570
Book TitleJain Agamo me Swarg Narak ki Vibhavana
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHemrekhashreeji
PublisherVichakshan Prakashan Trust
Publication Year2005
Total Pages324
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & agam_related_other_literature
File Size17 MB
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