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बृहत्कल्पसूत्र द्वितीय विभागनो विषयानुक्रम ।
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गाथा
पत्र
४६७-६९
विषय १५९१ . स्थापनाकुलोमां जवानो विधि अने एकांतरे बेआंतरे
स्थापनाकुलोमां नहि जवामां दोपो तेमज ते उपर वसुकी गएली गाय अने आराम-बगीचानां
दृष्टांतो १५९२-१६०१ स्थापनाकुलोमां जवा लायक अथवा मोकलवा
लायक वैयावृत्यकरो-गच्छनी सेवा करनार साधुओ
अने तेमना गुण-दोषो १६०२-८ वैयावृत्य करनारना गुणोनी तपास करवानां
कारणो अने श्रावकोने गौचरचर्याना दोषो समजाववाथी थता लामो
[गाथा १६०७-लुब्धकनुं दृष्टान्त ] १६०९-१० स्थापनाकुलोमांथी विधिपूर्वक योग्य द्रव्योनुं लेQ १६११-१४ जे क्षेत्रमा एक ज गच्छ रहेलो होय तेमने आश्री
स्थापनाकुलोमांथी भिक्षा लेवानी सामाचारी १६१५-२२ जे क्षेत्रमा वे त्रण आदि गच्छो एक वसतिमां
अथवा जुदी जुदी वसतिओमां रह्या होय तेमने आश्री भिक्षा लेवा आदिनी सामाचारी
४६९-७१
४७२
४७२-७३
४७४-७६
१६२३-३३
४७६-७९
७ गच्छवासीओनी सामाचारी स्थविरकल्पिको-गच्छवासीओनी चक्रवाल सामाचारी तेमज श्रुत, संहनन, उपसर्ग, आतंक, वेदना, कतिजनाः, स्थंडिल, वसति, उच्चार, प्रस्रवण, अवकाश, तृणफलक, संरक्षणता, संस्थापनता, प्राभृतिका, अग्नि, दीप, भिक्षाचर्या, पानक, लेपालेप, आचाम्ल आदि द्वारोने लक्षीने सामाचारी
८ स्थविरकल्पिकोनी स्थिति स्थविरकल्पिकोनी अर्थात् गच्छवासीओनी क्षेत्र, काल, चारित्र, तीर्थ, पर्याय, आगम, वेद, कल्प, लिंग, लेश्या, ध्यान, गणना, अभिग्रह, प्रत्राजन, मुंडापन, कारण, प्रतिकर्म आदि द्वारोने आश्री स्थिति-विद्यमानता
४७६-७९ ४७९-८७
१६३४-५५