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________________ लाक्षणिक-दार्शनिकनामसूचिः १.८. भ्रान्तज्ञान ११. २०. [ मिथ्याविकल्पविज्ञानभावनापरिपाक ८२. २७. भ्रान्ति ११.२१, १५.२६,३४.६, १२, ३६. २८, मिथ्याविकल्पात्मक ३८. ४,६; ३९ २१, ४०. १३; ४२.९,५३. मिथ्याविकल्पौध ४३. १५. १५, ५४. ९,१०२.२,६. मिथ्याव्यवहार भ्रान्तिकारण . ५७. ११, ९७. १४, १०१. ३. मिथ्याव्यवहारभेद ४.१०. मणि . ३८. ४, ८४. २३. | मिथ्येतरात्मक ४. १४. मणिभ्रान्ति ३८. ४. मिथ्यकान्त १४. २; ११४. २३. मण्यादिसामग्रीप्रभव १०.१३. | मिथ्यकान्तकलंकित ८१. १९. मति ४. २३; २२. २८. मिथ्यकान्तपरिग्रह ११०. २६. मतिज्ञान २. २८. मिथ्यकान्तप्रलापिन् ११६. २२. मतिपूर्वक ७४. ३०. मिथ्यकान्तप्रवाद ९१. ६. मतिभेद २२. २८. मिथ्र्यकान्ताविशेष १४. ६. मतिमान् १०१. १५. मिथ्योत्तर ७९. २७, ८०. १४; ११३. २३. मतिलक्षणसंग्रह ९३.१२. मिथ्योह मतिविकल्प १२५. १९. मुक्तादिविशेष ११५. २. मतिविभ्रम १००. १. मुख्य (प्रत्यक्ष) २.८. मतिश्रुत ९८.२०,१०६. २०:११७. १५:११८. मुख्य २०. २४, २६; २१. १; ७५. ३. ४; १२२. २१,१२६. १८. मुख्यसंव्यवहार १. १२. मतिश्रुतावधिमनःपर्ययकेवलानि १२७.४. मुनि ८८.२६. मत्यज्ञानादि १२७. ५. मुमुक्षु २०. ३. मदिरादिवत् ११९. १९. ममुक्षुजनमोक्षमार्गोपदेशद्वारण द्वारण २६.२४. मनस् ५१. २. मूच्छितादि ४०. २०; १०७ ३. मनोमति २३. १. मूर्त २०. १०; ११९. २२. मन्त्रादि ११९. १९. मूर्तत्व २३. १३. मन्द ७३. ९. मूर्तप्रतिबिम्बभृत् २०. ११. मन्दबुद्धि २२. १८; ७७. २२, १०१. ८. | मूर्तमुखादिप्रतिबिम्बधारिन २०. १०. मयूरवत् ४६. १४, १०७. १८. मत्तिधर्माभाव २०. १०. मलक्षय ७८. २६. मूतिमत् १२७. ११. मलविद्धमणिव्यक्ति १९. २४. मूलनय २३. २. महात्मन् २६. २१. मृग ४८. ५, ८०.४, ५. म हा वीर १८. ५. मत्पिण्ड २५. ३. महीयस् ५२.११, ९९. १२. | मेचकादिवत् ५९. २; १०३. ६; ११४. ७. ८८. १८. मैत्र्यादिप्रतिरोध ८९. १७. मार्गप्रतिपत्तिनिक्षिप्तेतरवस्तुस्वभाव १२७. १४. मोक्ष ८३. १४; ८९. २५; ११९. १२. मात्रा ६८. ४. मोक्षज्ञान ८८. २६. मात्रानुरोध ६८. १८. मोह ३५. १७; ३९. १९, ७३. ११. मात्राभेद १०२. २८. मोहादिमूर्त्तानुप्रवेश ११९. १९. मानस ५०. २३, ९८. १०, १६, १७,१२०. १७. | मोहादिसम्बन्धान्वयव्यतिरेकानुविधायिन् १२०. २. मानान्तरसिद्धि १०९.१०. म्लेच्छादिव्यवहार मानाभास ९८. २२, २३. यत्न ८५.२६. माया १४. १०, यथागम . १८.६. मिथ्याकारैलक्षण ४८. ११. यथार्थ ३४. १६; १०७. १४. मिथ्याज्ञान ८९. १७, २९. यथार्थदर्शन ९८. १५. मिथ्यात्व ९३. २४. यथार्थदर्शनादिगुणवैगुण्य ११७. १९. मिथ्यार्थप्रतिभासिन् ५८. १५. यथार्थदर्शनादिसाकल्यवैकल्यप्रतिबन्ध ११६. ३०. मिथ्यार्थसंग्रह १२६. ९. यथार्थनिर्णयसाधन २. १. मिथ्यादृष्टि ११५. ५. यथाभिप्रायगतजल्पव्यवसायशृङ गग्राहिका १२४.११. मिथ्याप्रत्यबमर्श ४७. १४. यथावस्तुबलागम ५३. १५. मिथ्याभयानकग्रस्त ४८. ५. यदृच्छया ६४. ४. मिथ्याविकल्पक ३१. ९, ११७. २२. | यमलकवत् ९१. २५. मार्ग Jain Education international For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002504
Book TitleAkalanka Granthtrayam
Original Sutra AuthorBhattalankardev
AuthorMahendramuni
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1969
Total Pages390
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size21 MB
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