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________________ सचित्र उत्तराध्ययन सूत्र एकादश अध्ययन [ 112] इक्कारसमं अज्झयणं : बहुस्सुयपुज्जा एकादश अध्ययन : बहुश्रुत पूजा Chapter-11: ADORATION OF ACCOMPLISHED SCHOLARLY ASCETICS संजोगा विप्पमुक्कस्स, अणगारस्स भिक्खुणो । आयारं पाउकरिस्सामि, आणपुव्विं सुणेह मे ॥ १ ॥ सभी संयोगों से विप्रमुक्त भिक्षाजीवी अनगार के आचार का मैं अनुक्रम से वर्णन करूँगा। उसे मुझसे सुनो ॥ १ ॥ I will describe the conduct of a homeless ascetic, who is free of all worldly ties, in proper sequence. Listen that from me. (1) जे यावि होइ निव्विज्जे, थद्धे लुद्धे अणिग्गहे । अभिक्खणं उल्लवई, अविणीए अबहुस्सुए ॥ २॥ जो विद्याहीन - ज्ञानहीन है अथवा विद्यावान होकर भी अहंकारी है, रसादि विषयों में लोलुप है, इन्द्रिय और मन का निग्रह नहीं करता, बार-बार असंबद्ध बोलता है और अविनीत है - वह अबहुश्रुत है॥ २ ॥ One who is ignorant of truth or learned but conceited and arrogant, infatuated with sensual pleasures, greedy, devoid of control over his senses and mind, compulsive chatterer and immodest, is not an accomplished scholarly ascetic. (2) अह पंचहिं ठाणेहिं, जेहिं सिक्खा न लब्भई । थम्भा कोहा पमाएणं, रोगेणाऽलस्सएण य ॥ ३॥ (१) अभिमान, (२) क्रोध, (३) प्रमाद, (४) रोग, और (५) आलस्य - इन ५ कारणों से विद्या की प्राप्ति नहीं होती ॥ ३ ॥ Gaining knowledge is improbable for these five reasons- 1. Conceit, 2. Anger, 3. Stupor, 4. Disease, and 5. Lethargy. (3) अह अट्ठहिं ठाणेहिं, सिक्खासीले ति वच्चई । अहस्सिरे सया दन्ते, न य मम्ममुदाहरे ॥ ४ ॥ इन ८ कारणों से व्यक्ति शिक्षाशील कहा जाता है - (१) अमर्यादित हँसी-मजाक नहीं करना, (२) शान्त - दान्त रहना, (३) किसी का मर्म प्रकाशित नहीं करना ॥ ४ ॥ By eight factors a man (disciple) is called well-versed-1. not indulging in unlimited frolic and mirth, 2. remaining calm and composed, 3. not revealing secrets of others. (4)
SR No.002494
Book TitleAgam 30 mool 03 Uttaradhyayana Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2011
Total Pages726
LanguageHindi, Prakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size28 MB
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