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________________ १०४ समन्वय, शान्ति और समत्वयोग का आधार अनेकान्तवाद पंचास्तिकाय - अमृतचन्द्रसूरि की टीका प्रमाणनय तत्त्वालोक - वादिदेवसूरि पश्चिमी दर्शन : दीवानचन्द पाश्चात्य दर्शन का आधुनिक युग पार्श्वनाथ के चतुर्याम - धर्मानन्द कौशांबी ब्रह्मसूत्र शांकर भाष्य ब्रह्मसूत्र निबार्क भाष्य बौद्धदर्शन : शर्बेत्सकाय भगवतीसूत्र भगवत गीता भारतीय दर्शन - राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति में जैन दर्शन का योगदान : हीरालाल भारतीय चिन्तन परम्परा : दामोदर भारतीय दर्शन : गेरोल भारतीय दर्शनों का समन्वय - डॉ. आदित्यनाथ झा माध्यमिक वृत्ति मज्झिमनिकाय रत्नाकरावतारिका वेदिक इंडेक्स श्रमण संस्कृति का विकास एवं विस्तार - डॉ. पुष्यमित्र शास्त्रवार्ता समुच्चय - हरिभद्र शिवमहिमा स्त्रोत षड्दर्शन समुच्चय - हरिभद्र षड्दर्शन समुच्चय - गुणरत्नसूरि टीका षड्दर्शन समुच्चय - मालवणिया सन्मति तर्क सूत्रकृतांग सप्तभंगीतरंगिणी : विमलदास समयसार स्याद्वादमंजरी : जगदीशचन्द्र शास्त्री
SR No.002458
Book TitleSamanvay Shanti Aur Samatvayog Ka Adhar Anekantwad
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPritam Singhvi
PublisherParshwa International Shaikshanik aur Shodhnishth Pratishthan
Publication Year1999
Total Pages124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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