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________________ गुजरात विभाग : १७ - सरत जिला (399 TIONED मूलनायक श्री आदीश्वरजी mmH आदीश्वरजी जैन मंदिर संग्रामपुरा जैन मंदिर दादा आदीश्वरजी, दूर थी आव्यो, दादा दरिशन दीयो, कोई आवे हाथी घोडे, कोई आवे चले पलाणे, कोई आवे पग पाले, दादा ने दरबार, हाँ-हाँ दादा ने दरबार, दादा आदीश्वरजी, दूरथी आव्यो, दादा दरिशन - दीयो .....१ शेठ आवे हाथी घोड़े, राजा आवे चले पलाणे, हुँ आQ पगपाले, दादाने दरबार, हाँ-हाँ दादाने दरबार.....दादा आदीश्वरजी....२ कोई मूके सोना रूपा, कोई मूके महोर, कोई मूके चपटी चोखा, दादा ने दरबार हाँ-हाँ दादाने दरबार, दादा आदीश्वरजी .....३ शेठ मूके सोना रूपा, राजा मूके महोर। हुँ मूकुं चपटी चोखा, दादा ने दरबार हाँ-हाँ दादाने दरबार, दादा आदीश्वरजी .....४ कोई मांगे कंचन काया, कोई मांगे आँख, - कोई मांगे चरणनी सेवा, दादाने दरबार, हाँ-हाँ दादाने दरबार, दादा आदीश्वरजी.....५ पांगलो मांगे कंचन काया, आंधलो मांगे आंख, हु मांगु चरणनी सेवा, दादाने दरबार, हाँ-हाँ दादा ने दरबार, दादा आदीश्वरजी .....६ हीर विजय गुरू हीरलो ने वीर विजय गुण गाय, शत्रुजयना दर्शन करतां, आनंद अपार हाँ-हाँ आनंद अपार, दादा आदीश्वरजी, _दूर थी आव्यो; दादा दरिशन दीयो IRDO AA R
SR No.002430
Book TitleShwetambar Jain Tirth Darshan Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinendrasuri
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year1999
Total Pages548
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size114 MB
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