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________________ एस धम्मो सनंतनो का जादू फैल जाता है; दूर-दूर तक उनका जादू फैल जाता है। जिनको भी फिर स्वयं को जीतना है, वे उनके जादू में आ जाते हैं। और मजा यह है कि जबरदस्ती नहीं है कोई। बुद्ध के चरणों में कितने लोग आकर झुके। सिकंदर ने भी बहुत लोगों को चरणों में झुकाया, लेकिन वे झुके नहीं थे, झुकाया था। जब तुम किसी को झुका लेते हो, तब जरा गौर से देखना, वह तो अकड़ा ही खड़ा है; सिर्फ देह झुकती है। जब कोई अपने से झुकता है, स्वेच्छा से, तभी झुकता है। प्रेम में और सिर्फ प्रेम में ही जीत होती है। और तो कोई जीत नहीं है। ___लेकिन अपने को जीता हो तभी प्रेम की संभावना है। जिसने अपने को जीता हो, वही प्रेम को देने में समर्थ हो पाता है। बहुत उसके पास आकर हार जाते हैं। और मजा यह है कि उंस हार में वे सब अपनी विजय का पहला कदम उठाते हैं। हार भी जीत की तरफ पहला कदम होती है। हारना हो तो बुद्धों से हारना; क्योंकि उससे ही तुम जीतने की तरफ आगे बढ़ोगे। हारना हो तो उनसे हारना जिन्होंने अपने को जीत लिया हो; तो तुम भी जीत की यात्रा पर निकल जाओगे। ___ 'इन इतर प्रजाओं को जीतने की बजाय अपने आप को जीतना श्रेष्ठ है। अपने को दमन करने वाला और नित्य अपने को संयम करने वाला जो पुरुष है, उसकी जीत को न देवता, न गंधर्व और न ब्रह्मा सहित मार ही अनजीता कर सकते हैं।' एक ही जीत है, जिसे कोई दूसरा अनजीता नहीं कर सकता; जिसे कोई दूसरा हार में नहीं बदल सकता; बाकी तो सब जीतें कोई दूसरा हार में बदल सकता है। जो दूसरे के द्वारा हार में बदली जा सकती है, वह जीत का धोखा है, जीत नहीं। जो किसी के भी द्वारा हार में नहीं बदली जा सकती, वही जीत है; वही शाश्वत जीत है। सूत्र क्या है? 'अपने को दमन करने वाला।' बुद्ध के समय में दमन शब्द के अर्थ बड़े दूसरे थे, अब वैसे नहीं हैं। फ्रायड के बाद दमन का अर्थ पूरा का पूरा बदल गया। अब दमन एक निंदित शब्द है। बुद्ध के समय में दमन का गुण-धर्म और था। बुद्ध क्या अर्थ करते थे दमन का? वे यही अर्थ करते थे, जो हम आज शांत का करते हैं, दान्त का-वही अर्थ था उन दिनों। जिसके भीतर की सभी वासनाएं शांत हो गई हैं, जिसने अपनी वासनाओं को शांत कर लिया। दमन, दम; शांति की प्रक्रिया का नाम था। अब इस शब्द का उपयोग खतरनाक है, क्योंकि फ्रायड की खोजों के बाद इस शब्द ने एक नया अर्थ ले लिया है, वह है रिप्रेशन का जिसने अपनी वासनाओं को दबा लिया। अब दमन का अर्थ होता है : दबा लेना, तब दमन का अर्थ होता थाः 292
SR No.002381
Book TitleDhammapada 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorOsho Rajnish
PublisherRebel Publishing House Puna
Publication Year1991
Total Pages314
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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