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________________ ड) प्राकृत भाषा और साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास : (ले. डॉ. नेमीचंदजी शास्त्री) पृ. २३८ । च) जैन ज्ञानकोश - खंड २ (संग्राहक - अज्ञात ) पृ. २२ छ) भावना योग : (आ. आनंदऋषीजी महाराज) पृ. २४९ १५५) आवश्यक सूत्र : (युवाचार्य मधुकर मुनिजी) श्रमण सूत्र पृ. ५० १५६) क) जैन लक्षणावली (सं. बालचंद सिद्धांत शास्त्री) पृ. १८७ ख) इशादि नौ उपनिषद (व्याख्याकार हरिकृष्णदास गोयंदका) पृ. ११ ग) छान्दोग्योपनिषद - खंड - ३ (गीता प्रेस गोरखपूर) पृ. ५१३ १५७) क) जैन तत्व प्रकाश : (पू. अमोलक ऋषिजी महाराज) पृ. १७३-१८१ ख) आवश्यक सूत्र : (मधुकर मुनिजी) पृ. १३६, १३७ १५८) श्री बृहद् जैन धोक संग्रह, पृ. ४८८ १५९) श्री बृहद् जैन थोक संग्रह, पृ. ७९ १६०) त्रैलोक्य दीपक : (ले. भद्रंकर विजयजी) पृ. ४०९, ४१० १६१) मंगलमय णमोकार एक अनुचिंतन : (डॉ. नेमिचंद शास्त्री) पृ. ४१-४२ १६२) अष्टपत्रे सिताम्भोजे, कर्णिकायां कृत स्थितम् ॥ आद्यं सप्ताक्षरं मंत्र पवित्रं चिन्तयेत्ततः ॥ सिद्धादिकं चतुष्कंच, दिक् पत्रेषु चिन्तयेत् ।। - चूलापाद चतुष्कंच, विदिक् पत्रेषु चिन्तयेत् ।। योगशास्त्र प्रकाश -८, श्लोक ३३-३४ १६३) क) संस्कृत हिन्दी कोश : (वामन शिवराम आपटे) पृ. १०४६ ख) मंगलमय नवकार - पृ. ४१ १६४) क) बारस गुण अरिहंता, सिद्धा अठेव सुरि छत्तीसा ।। उवज्झाया पणवीसा, साहू सगवीस अट्ठसयं नमस्कार चिंतामणि (भद्रंकर विजयजी) पृ. ४२ ख) सचित्र नमोक्कार महामंत्र श्लोक पृ. २० १६५) मंगल वाणी, पृ. ३८१, ३८२ १६६) क) समरो मंत्र भलो नवकार : ले. कुंदकुंद विजयजी - पृ. १५ ख) जैन साधना योग - पृ. ८२-८४ (१७०)
SR No.002297
Book TitleJain Dharm ke Navkar Mantra me Namo Loe Savva Sahunam Is Pad ka Samikshatmak Samalochan Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorCharitrasheelashreeji
PublisherSanskrit Bhasha Vibhag
Publication Year2006
Total Pages350
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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