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________________ पाठ ७३ अर्थ चिंतिम शब्द अर्थ संतुट्ठ सन्तुष्ट हुआ/हुई भणि कहा हुआ/हुई गमिअ गया हुआ/हुई पढिअ पढ़ा हुआ/हुई अहीअ पढ़ा हुआ/हुई रक्खिअ रक्षित हुआ/हुई कुविअ क्रोधित हुआ/हुई विअसिअ विकसित हुआ/हुई चिंतित हुआ/हुई लिहिअ .. लिखा हुआ/हुई ण झुका हुआ/हुई कअ. किया हुआ/हुई न? नष्ट हुआ/हुई गअ ... गया हुआ पूइअ पूजित हुआ/हुई हअ . मरा हुआ/हुई भी डरा हुआ/हुई णाअ जाना हुआ . मुइ _ . आनन्दित हुआ/हुई दिट्ठ देखा हुआ नि. ७५ : मूल धातु में 'अ' प्रत्यय लगने पर तथा विकल्प से धातु के अ को इ होने पर भूतकाल के कृदन्त रूप बनते हैं। यथा-गम+इ+ अ = गमिअ। णा+ अ = णा। नि. ७६ : इन विशेषण शब्दों के रूप तीनों लिंगों में सभी विभक्तियों में विशेष्य के अनुसार बनेंगे। उदाहरण वाक्य : प्रथमा-एकवचन पु. संतुटुं णिवो धणं देइ संतुट्ठा णिवा' धणं देन्ति स्त्री. संतुट्ठा णारी लज्जइ संतुट्ठाओ णारीओ मुअन्ति नपुं. संतुटुं मित्तं किं करइ संतुट्ठाणि मित्ताणि कज्ज करन्ति द्वितीया-एकवचन बहुवचन पु. संतुटुं णिवं सो नमइ संतुट्ठा णिवा को ण इच्छइ स्त्री. संतुटुं णारिं सो इच्छइ संतुट्ठाओ णारीओ ते इच्छन्ति नपुं. संतुटुं मित्तं अहं इच्छामि संतुट्ठाणि मित्ताणि सो धणं देइ तृतीया-एकवचवन बहुवचन पु. संतुट्टेण णिवेण सह सुहं होइ संतुटेहि णिवेहि कलहं ण होइ स्त्री. संतुट्ठाए णारीए विणा सुहं णत्थि संतुट्ठीहि णारीहि सह सो वसइ नपुं. संतुटेण मित्तेण सह अहं वसामि संतुढेहि मित्तेहि सह सो गच्छइ . बहुवचन १०८ प्राकृत स्वयं-शिक्षक
SR No.002253
Book TitlePrakrit Swayam Shikshak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPrem Suman Jain
PublisherPrakrit Bharati Academy
Publication Year1998
Total Pages250
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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