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________________ ६८८ जैन धर्म का मौलिक इतिहास - द्वितीय भाग १. उत्तरज्भयरणा इं २. दसा ३. कप्पो ४. ववहारो ५. निसीह ६. महानिसीह ७. इसिभासियाई ८. जंबूदीवपण्णत्ती ६. दीवसागरपण्णत्ती १०. चंदपण्णत्ती ११. खुड़ियाविमारणपविभत्ती १२. महल्लिया विमारंगपविभत्ती १३. अंगचूलिया १४. विवाह चूलिया १५. अरुणोववा १६. वरुणोववाए १७. गरुलोववाए १८. धरणोववाए १ आचारांग २ सूत्रकृतांग ३ स्थानांग ४ समवायांग ५ भगवती ६ ज्ञाताधर्मकथांग १ प्रोपपातिक २ राजप्रश्नीय ३ जीवाभिगम ४ प्रज्ञापना ५ जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति ६ चन्द्र प्रज्ञप्ति Jain Education International इस प्रकार कुल ७५ श्रुत बताये गये हैं । श्वेताम्बर मूर्तिपूजक परम्परा द्वारा वर्तमान में ४५ श्रागम माने जाते हैं पर स्थानकवासी और तेरापन्थ परम्परा में ११ अंग, १२ उपांग, ४ मूल, ४ छेद और १ श्रावश्यक इस प्रकार ३२ शास्त्रों को प्रामाणिक मानते हैं । ४५ सूत्रों की संख्या इस प्रकार है : ११ अंग : १६. वेसवणोववाए २०. वेलंधरोववाए २१. देवेन्दोववाए २२. उट्ठारणसुयं २३. समुट्ठारणसुयं २४. नागपरियावलियानो २५. निरयावलियाम्रो २६. कप्पिया २७. कप्पवडंसिया २८. पुफियाओ २६. पुप्फचूलियानो ३०. वहिदा १२ उपांग : ३१. श्रासीविसभावरणारणं ३२. दिट्ठिविभावरणाणं ३३. सुमिरणभावणारणं ३४. महासुमिरणभावरणा ३५. तेयग्गिनिसग्गाणं [ कालिकश्रुत ७ उपासकदशांग अंतकृतदशांग ६ अनुत्तरोपपातिकदशांग १० प्रश्नव्याकरण ११ विपाक श्रुत ७ सूरप्रज्ञप्ति ८ कल्पिका C कल्पावतं सिका १० पुष्पिका ११ पुष्पचूलिका १२ वृष्णिदशा For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.002072
Book TitleJain Dharma ka Maulik Itihas Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHastimal Maharaj
PublisherJain Itihas Samiti Jaipur
Publication Year2001
Total Pages984
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, History, Story, & Pattavali
File Size19 MB
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