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________________ १९० पिंडनियुक्ति ५. कम्पमान शरीर वाला। ६. ज्वरित-ज्वर रोग से पीड़ित। ७. अन्ध। ८. गलत्कुष्ठरोगी। ९. पादुका पहने हुए। १०. दोनों हाथों में हथकड़ी पहने हुए। ११. पैरों में बेड़ी पहने हुए। १२. हाथ-पैर से विकल। १३. त्रैराशिक-नपुंसक। १४. गर्भवती स्त्री। १५. बालवत्सा स्त्री-स्तन्योपजीवी शिशु वाली। १६. भोजन करती हुई स्त्री। १७. दही आदि मथती हुई स्त्री। १८. चने आदि मूंजती हुई स्त्री। १९. गेहूं आदि दलती हुई स्त्री। २०. ऊखल में तंडुल आदि का कंडन करती हुई स्त्री। २१. शिला पर तिल आदि पीसती हुई स्त्री। २२. रुई पीजती हुई स्त्री। २३. कपास का मर्दन करती हुई स्त्री। २४. सूत कातती हुई स्त्री। २५. रुई की बार-बार छंटनी करती हुई स्त्री। २६. षट्जीवनिकाय से युक्त हाथ वाली स्त्री। २७. भिक्षा देते समय छह जीवनिकायों को भूमि पर डालने वाली स्त्री। २८. उन्हीं छह जीवनिकायों को कुचलती हुई स्त्री। २९. उन्हीं जीवनिकायों का शरीर के अन्य अवयवों से स्पर्श करती हुई स्त्री। ३०. षड्जीवनिकायों का हनन करती हुई स्त्री। ३१. दही आदि से लिप्त हाथ वाली स्त्री। ३२. दही आदि से लिप्त पात्र से देने वाली स्त्री। ३३. बड़े बर्तन से भिक्षा देने वाली स्त्री। ३४. अनेक व्यक्तियों की वस्तु स्वयं देती हुई स्त्री। ३५. चुराई हुई वस्तु देने वाली स्त्री। ३६. प्राभृतिका की स्थापना करने वाली स्त्री। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001945
Book TitleAgam 41 Mool 02 Pind Niryukti Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDulahrajmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2008
Total Pages492
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_pindniryukti
File Size9 MB
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