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________________ पिंडनियुक्ति १३६/१-६ प्रादुष्करण दोष में कथानक का उल्लेख। १३७-१३८/६ प्रादुष्करण के भेद एवं उसकी व्याख्या। १३९-१४३/३ क्रीतकृत के भेद-प्रभेदों की व्याख्या एवं कथानक। १४४-१४४/४ प्रामित्य के भेद एवं भाई-बहिन का दृष्टान्त। १४५ प्रामित्य विषयक वस्त्रादि से संबंधित दोष। १४६ प्रामित्य विषयक अपवाद। १४७-५० परिवर्तित द्वार की व्याख्या एवं लौकिक उदाहरण। १५१-१५७/६ अभ्याहृत के भेद-प्रभेद एवं उसके दृष्टान्त। १५८, १५९ आचीर्ण अभ्याहृत के भेद एवं उनका स्वरूप-कथन। १६० अभ्याहृत विषयक कल्प्याकल्प्य विधि। १६१ आचीर्ण अभ्याहृत के जघन्य, मध्यम आदि भेद। १६२-६४ उद्भिन्न द्वार की व्याख्या एवं उसके दोष। १६५-७१ - मालापहत द्वार के भेदों की व्याख्या एवं भिक्षु का उदाहरण। १७२-१७७/२ आच्छेद्य के भेदों की व्याख्या एवं गोप का दृष्टान्त। १७८-८५ अनिसृष्ट द्वार की व्याख्या तथा मोदक का दृष्टान्त । १८६-१८८/१ अध्यवपूरक के प्रकार एवं कल्प्याकल्प्य विधि। १८९ सोलह उद्गम दोष के दो भेद। १९० अविशोधि कोटि की व्याख्या। अविशोधि कोटि से स्पृष्ट अन्न के दोष। १९२-१९२/५ विशोधिकोटि की व्याख्या एवं चतुर्भगी। १९२/६ कोटिकरण के दो प्रकार। १९२/७ प्रकारान्तर से नौ एवं सत्तर भेद। १९३ उद्गम दोष गृहस्थ से समुत्थित तथा उत्पादना के दोष साधु से संबंधित। १९४ उत्पादना के निक्षेप एवं भेद-प्रभेद। १९४/१ सचित्त द्रव्य उत्पादना। १९४/२ मिश्रद्रव्य उत्पादना। १९४/३ भाव उत्पादना के दो भेद। १९५, १९६ उत्पादना के सोलह दोष। धात्री के पांच प्रकार। धात्री शब्द का निरुक्त। १९८/१-१५ धात्रीत्वकरण एवं उसके दोष। १९९ धात्री दोष में संगम स्थविर एवं दत्त शिष्य की कथा। २००, २०१ दूती के भेद-प्रभेद । १९७ १९८ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001945
Book TitleAgam 41 Mool 02 Pind Niryukti Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDulahrajmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2008
Total Pages492
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_pindniryukti
File Size9 MB
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