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________________ विषय सूची ९४ ९४ / १,९५ ९५/१, २ ९६ ९६/१-३ ९६/४ ९७-९९ ९९/१ ९९/२ १०० १०१ १०१ / १, २ १०२, १०३ १०४ १०५, १०५/१ १०६ १०७ १०८ - १०८/२ १०९ ११० १११ ११२-१४ ११५ - ११७/४ ११८ ११९ ११९/१ १२० १२१ १२२-२४ १२५ १२६-२९ १३०-३६ Jain Education International औशिक के बारह भेद-प्रभेद । ओघ औदेशिक का स्वरूप - कथन । ओघ औद्देशिक से संबंधित शंका और समाधान । साधु को अमूच्छित रहकर भिक्षा करने का निर्देश । गोवत्स का दृष्टान्त एवं उपनय । विभाग औद्देशिक की संभाव्यता । विभाग औद्देशिक के भेद-प्रभेद । द्रव्यादि अच्छिन्न औद्देशिक । द्रव्यादि छिन्न औद्देशिका | उद्दिष्ट की अपेक्षा कल्प्याकल्प्य विधि | सम्प्रदान विभाग की अपेक्षा कल्प्याकल्प्य विधि | उद्दिष्ट औद्देशिक का स्वरूप । कृत औद्देशिक का संभव हेतु तथा उसका स्वरूप-कथन । कर्म औद्देशिक का संभव हेतु तथा उसका स्वरूप- कथन । औद्देशिक संबंधित कल्प्याकल्प्य विधि । औद्देशिक आहार लेने वाले की निंदा । पूतिकर्म के भेद - प्रभेद । द्रव्यपूति का स्वरूप एवं उससे संबंधित कथा । भावपूर्ति का स्वरूप । आधाकर्म, औद्देशिक आदि छह दोषों का उद्गम कोटि में समावेश । बादरपूर्ति के भेद | भक्तपान आदि से संबंधित बादरपूति की व्याख्या । सूक्ष्म पूर्ति की व्याख्या । पूर्ति विषयक कल्प्याकल्प्य विधि । पूर्ति की परिभाषा । पूर्ति के परिज्ञान का उपाय । मिश्रजात के तीन भेद । यावदर्थिक मिश्रजात का स्वरूप । मिश्रजात में पाखण्डिमिश्र आदि की व्याख्या एवं दृष्टान्त । मिश्रजात की कल्प्याकल्प्य विधि | ७ स्थापनादोष के भेद एवं उसकी व्याख्या । प्राभृतिका के भेदों का उल्लेख, दारिका का दृष्टान्त, प्राभृतिका का परिहार न करने के दोष । For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001945
Book TitleAgam 41 Mool 02 Pind Niryukti Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDulahrajmuni
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2008
Total Pages492
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_pindniryukti
File Size9 MB
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