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________________ उ० ३ सूत्र १२ ८६३ व्यवहारसूत्र-सूची परिहारकल्प और आहार-व्यवहार पारिहारिक और अपारिहारिक का परस्पर-व्यवहार पारिहारिक को स्थविरों की आज्ञा से आहार देना स्थविर सेवा स्थविरों के लिये परिहार कल्पस्थित आहार लावे ३० परिहार कल्पस्थित अन्य के पात्र का उपयोग न करे तृतीय उद्देशक १-२ गण प्रमुख बनने का संकल्प क- स्थविरों को पूछकर गण प्रमुख बने ख- विना पूछे न बने ग- बिना पूछे बने तो प्रायश्चित्त ३-१० संघ प्रमुख पद उपाध्याय पद क- श्रुत चारित्र सम्पन्न तीन वर्ष के दीक्षित को देना ख- श्रुत चारित्र रहित को न देना आचार्य-उपाध्याय पद ग- श्रुत चारित्र सम्पन्न पाँच वर्ष के दीक्षित को देना घ- श्रुत चारित्र रहित को न देना ___आचार्य, उपाध्याय और गणावच्छेदक पद ङ. श्रुत चारित्र सम्पन्न आठ वर्ष के दीक्षित को देना च- श्रुत चारित्र रहित को न देना छ- योग्य नव-दीक्षित को देना ज- संयम से पतित योग्य व्यक्ति के पुनः संयमी बनने पर देना ११-१२ प्रमुख के आधीन रहना Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001931
Book TitleJainagama Nirdeshika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1966
Total Pages998
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_index
File Size9 MB
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