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________________ वक्ष० ४ सूत्र ६५ ६८६ जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति सूची स्व- सात रात्रि की सतत वर्षा से भरत सेना की सुरक्षा ग- विविध धान्यों के नाम ६१ क- चिन्तित भरत के सहयोग के लिये सोलह हजार देवों का आना और मेघमुख नाग कुमार को वर्षा करने से रोकना ख- चिलातों द्वारा आत्म समर्पण और भरत से क्षमा याचना ग- भरत की आज्ञा से सुसेण सेनापति का सिन्धु नदी के पश्चिम तटवर्ती प्रदेशों को आज्ञाधीन करना ६२ क- चूल्ल हिमवंत गिरि की और चक्ररत्न का बढना ख- चुल्ल हिमवंत देव की आराधना के लिये भरत का अपम तप करना ग. चौथे दिन प्रात: चूल्ल हिमवंत देव की सीमा में शर फेंकना घ- बहत्तर योजन पर्यन्त शर का जाना ङ- चुल्ल हिमवंत देव द्वारा भरत का सत्कार सन्मान और उत्तरी सीमा की सुरक्षा का आश्वासन ६३ क- भरत का ऋषभकूट पर्वत के समीप पहुँचना और अग्र शिला पर कांकणी रत्न से नामांकन करना ख- चुल्ल हिमवंत देव का अधान्हिका महोत्सव ग- दक्षिण में वैताढ्य पर्वत की और चक्ररत्न का बढना ६४ क- वैताढय पर्वत के समीप भारत का अष्टम तप ख. विद्याधर राज नमि-विनाम द्वारा भरत का उचित आतिथ्य, स्त्री रत्न का समर्पण ग- भरत द्वारा विद्याधर राज नमि-विनमि का मान संवर्धन ६५ क- खण्ड प्रपात गुफा के दक्षिण द्वार का उद्घाटन ख- नृत्यमाल देव की आराधना ग- भरत की आज्ञा से गंगातट वर्ती प्रदेशों को आज्ञाधीन करने के __लिये सुसेण का सफल प्रयाण घ- उमग्न-निमग्नजला नदियों को पार करना Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001931
Book TitleJainagama Nirdeshika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1966
Total Pages998
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_index
File Size9 MB
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