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________________ -६, ९, ५] पासणाहचरिउ [४५ अवगुण-पमाय-बज्जिउ अँबोहु खीरहरिउ किउ णरु जो अलोहु । मणि-रयण-कणय-जाणिय-विसेसु पारिखिउ थविजइ जो सुवेसु । घत्ता- छत्तीस-कम्म-थाणंतर सुहड धुरंधर पवरणर । णिय-रज्जे असेस परिट्ठिय णाइ दिसाग धरणिधर ॥ ७ ॥ दुवई- धवल-विसाल-णयणु जस-लंपडु जयसिरि-सयल-माणओ । पालइ सयल रज्जु चक्कंकिउ बंधव-सुहि-समाणओ ॥ कणयप्पहु णरवरु चक-णाहु महि-मंडलु पालइ जस-सणाहु । सम्माणु करइ जं जासु जुत्तु पुज्जइ गुरु पंच विणय-णिउत्तु । परिपालई बंधव सयल साहु णिग्गहइ महिहि जे णर असाहु । णव-णिहिहि मज्झि जं धणु विसालु तं देइ असेसु वि सब-कालु । तो वि अखय-णिहाणइँ खउ ण जाहिं बहु-रयणहँ भरियइँ पुणु वि थाहि । चक्केसरु चिंतइ जं मणेण . जक्वाहिउ आणइ तक्खणेण । वत्थालंकार विहूसणा सवैलहणे-ण्हाण-वर-भोयणा' । खीरोव-सलिल कुवलय-दलक्खु संपाडइ दिवि दिवि तासु जक्खु । अलिंद-वणहि जे कुसुम के वि चकेसर-पुण्णहि एंति ते वि। पत्ता- जं जोवइ कि पि णराहिउ अह जं चिंतइ णिय-मणेणें । संपज्जइ तं तहाँ महि-यलि" तवहाँ पहावें इह खणेग ॥ ८ ॥ 10 दुवई- अहिणव-रूव-कति-सम-सरिसहि" जुवइहि सहु महामहो । सरहसु करइ कीड मयणालसु विहवेणाइसयमहो । विहसिय-वयणहिँ दीहर-णयणहि। तरल-सुतारहि जणिय-वियारहि। गरुअ-णियंबहि णह-आयंवाहि। १४ क- स । १५ ख- पारक्खिय विजइ जो गवेसु । १६ ख- रेण । १७ क-इ। (८)१ क, ख- ण । २ ख- ल । ३ ख- वा । ४ क- 'णि । ५ क, ख- य । ६ ख- ह मज्झे । ७ खक्ख । ८ ख- जात्ति । ९क- इ । १० क- इ । ११ क, ख- 'म । १२ ख- 'णे । १३ क- "लें । १४ ख- °णि । १५ ख- ले। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001444
Book TitlePasanahchariyam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPadmkirti
PublisherPrakrit Text Society Ahmedabad
Publication Year1965
Total Pages538
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size12 MB
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