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________________ 92] सर्वार्थसिद्धि " 29 20 सास 29 जीवादि तत्त्वोंके अधिगमके उपायभूत छह गतिमार्गणाकी अपेक्षा चारों गतियों में अनुयोद्वारोंका निरूपण __ 16 संख्याका निरूपण इन्द्रियमार्गणाकी अपेक्षा जीवसंख्याका निरूपण 26 स्वरूप 16 कायमार्गणाकी अपेक्षा निर्देश अनुयोगद्वारसे सम्यग्दर्शनका निरूपण 16 योगमार्गणाकी अपेक्षा सम्यग्दर्शनके स्वामित्वका सामान्यसे निरूपण 16 वेदमार्गणाकी अपेक्षा सम्यग्दर्शनके स्वामित्वका विशेषकी अपेक्षा कषायमार्गणाकी अपेक्षा निरूपण करते हुए गतिमार्गणाके अनुवादसे ज्ञानमार्गणाकी अपेक्षा प्रतिपादन 16 संयम मार्गणाकी अपेक्षा इन्द्रियमार्गणाके द्वारा सम्यग्दर्शनके दर्शनमार्गणाकी अपेक्षा स्वामित्वका वर्णन 17 लेश्यामार्गणाकी अपेक्षा जीवसंख्याका निरूपण कायादि शेष मार्गणाओंके द्वारा सम्यग्दर्शनके भव्यमार्गणाकी अपेक्षा स्वामित्वका निरूपण 18 सम्यक्त्वमार्गणाकी अपेक्षा सम्यग्दर्शनके अभ्यन्तर और बाह्य साधनोंका संज्ञिमार्गणाकी अपेक्षा प्रतिपादन 19 आहारमार्गणाकी अपेक्षा सम्यग्दर्शनके अभ्यन्तर और बाह्म अधिकरणका निरूपण 3. क्षेत्रप्ररूपणा 29-32 सम्यग्दर्शनके औपशमिकादि भेदोंकी स्थिति सामान्यसे जीवोंके क्षेत्रका निरूपण का प्ररूपण 20 गतिमार्गणाकी अपेक्षा जीवोंके क्षेत्रका निरूपण 30 विधान-अनुयोगकी अपेक्षा सम्यग्दर्शनके इन्द्रिय मार्गणाकी , , 30 भेदोंका प्रतिपादन 21 कायमार्गणाकी , तत्त्वाधिगमके उपायभूत सत् संख्यादि आठ योगमार्गणाकी अनुयोगद्वारोंका निरूपण 21 वेदमार्गणाकी सत्. संख्यादि आठों अनुयोगों का स्वरूप 21 निर्देश व स्वामित्वादिसे सत् संख्यादिको ज्ञानमार्गणाकी पृथक् कहनेका कारण 22 संयममार्गणाकी 1. सत्प्ररूपणा 22-24 दर्शनमार्गणाकी सत् अनुयोगद्वारकी अपेक्षा जीव तत्त्वका लेश्यामार्गणाकी , मिरूपण 22 भव्यमार्गणाकी , जीव तत्त्वके विशेष-परिज्ञानके लिए चौदह सम्यक्त्वमार्गणाकी, " 32 मार्गणाओं का प्रतिपादन 22 संज्ञिमार्गणाकी , " 32 सत्प्ररूपणाके सामान्य और विशेष भेदोंके आहारमार्गणाकी , 32 द्वारा जीव तत्त्वका निरूपण 22 विशेषार्थके द्वारा क्षेत्रप्ररूपणका स्पष्टीकरण 32 चौदह मार्गणाओंमें संभव गुणस्थानोंका 4. स्पर्शन-प्ररूपणा 33-39 प्ररूपण 23 गुणस्थानोंकी अपेक्षा जीवोंके स्पर्शनका निरूपण 33 2. संख्या-प्ररूपण 24-29 गतिमार्गणाकी , चौदह गुणस्थानोंकी अपेक्षा जीव संख्याका इन्द्रियमार्गणाकी , निरूपण 24 कायमार्गणाकी Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001443
Book TitleSarvarthasiddhi
Original Sutra AuthorDevnandi Maharaj
AuthorFulchandra Jain Shastri
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1997
Total Pages568
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size14 MB
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