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________________ तिवण्णासमो संधि २०५ तो रण-रहसे' कह-मि ण माइउ मत्त-गइंदेहिं रिउ जगडाविय णच्चाविय कबघ वहु-भगेहिं गय मयगल रुलं ति मस्थिक्केहि वियलिय-पहरणे चूरिय-वाहणे ममीसंतु सुहड स-मडक्कउ णं मयगलु दुवालि लेवारिउ ण अजलंतु जलणु संधुक्किउ हणु भण तु दुजोहणु घाइड भिण्णइं जूहई धड विह डाविय रंगाविय रह-रहिय रहगेहि हय हय रहिय रहिय पाइक्केहिं ४ तहिं भज्जंतए पंडव-साहणे जमु जिह एक्कु भीम पर थक्कउ म सुत्तउ मइंदु वेयारिउ ण खय-काल-दंडु उबढुक्किउ ८ घत्ता रायजण-मज्झे समरे असञ्झे इह-पर-लोय-विरोहणहो । वोलाविउ सारहि रहवर सारहि छत्तई जहिं दुजोहणहो ॥ १. __रहवर वाहि वाहि लहु तेत्तहे गय-धड णिविड परहिय जेत्तहे त णिसुणेवि सारहि उच्छाहिउ अरिय-विमद्दणु सदणु वाहिउ भीम-महा-भर-वहणासक्कई रहु पक्खलइ चलति ण चक्कई णिय मुहरं गेहि पवर तुरगम सुडिय-पक्व किय गाई विहंगम ४ घाइउ झंप मुएवि धुरग्गले सारहि रहु आणिज्जइ पच्छले हजि महारहु चलण जे चक्कई जाइ वह तई कह-मि ण थक्कई रोसु जि सारहि हियउ जे चिंधउ ज गुरु-गय-धड-गंध-पइद्धउ लउडि जि रह-धुर हत्थ जे घोडा जे दप्पुब्भड-सुहड-णिहोडा धत्ता णिय-देहु जे रहवरु करेवि विओयरु धाइउ स-धणु स-पावरणु। णं हत्थि-हडोहह कउरव-जोहहं दुक्कीह्वउ जमकरणु ।। ९ ।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001428
Book TitleRitthnemichariyam Part 3 1
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorRamnish Tomar, Dalsukh Malvania, H C Bhayani
PublisherPrakrit Text Society Ahmedabad
Publication Year1996
Total Pages328
LanguagePrakrit, Apabhransh
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size13 MB
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