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________________ ९२ रिट्ठणेमिचरिउ. तहिं उभय-भीभ-संगाम-काले सच्चइ सुपरिष्ट्रिउ अंतराले सर-धोरणि मुक्क पियामहेण हय घाइय सारहि णिहय तेण दस-सरेहिं समाहउ गंग-पुत्तु सिणिणंदणु मच्छाहिवेण वुत्त । तेण-वि तिहिं ताडिउ सायएहिं जमदंड-परिह-सप्पाहरहि धत्ता किउ विरहु विराडु रणंगणे अज्जुणु ताम समावडिउ । पणवेप्पिणु गुरु गंगेयह आसत्थामहो अब्मिडिउ ॥ ९ - [११] वीभत्थु पलंव-महा-भुएण छहिं सरेहिं समाहउ गुरु-सुएण घणु तहो-वि छिण्णु कइ-केयणेण लहु अवरु लेवि दोणायणेण णाराय णउइ-वि पेसिय णरासु सत्तरि णारायण-रहवरासु सेयासें तासु-वि कवउ छिण्णु परिरक्खिउ कह-वि ण हियउ भिण्णु ४ गुरु-णंदणु वंभणु भणेवि चत्तु दुज्जोहणु भीमहो ताम पत्त दस-दसहिं णिसिद्ध सिला-सिएहिं । वर-रुप्पिय-पुंस्व-विहूसिएहिं अवरुप्परु विद्ध सरेहिं तेहिं सामरिसेहि पंडव-कउरवेहि कुरु-कवय-मह-मणि-तेयवंतु उरे सर परिवेढिउ विप्फुरंतु ८ रेहइ रयणुज्जल-विग्गहेहि णं दिणमणि समउ महागहेहिं धत्ता दुज्जोहण-भीम.पहारेहि वलई वे-वि कंपावियई । णउ जाणहूं कवणु जिणेसइ संसय-भावे चडावियई ॥ १० [१२] एत्तहे-वि स-संदण सावलेव स-सरासण स-सरय ण किय-खेव अहिमण्णुहो घाइय अमरिसेण पुरुमित्त-पियामह-चित्तसेण णर-सुरण लेवि धणु कणय-पिठ्ठ दस सरेहिं समाहउ धायरटु सत्तहिं पुरुमित्त सिलीमुहेहिं सत्तरिहिं पियामहु अहिमुहेहिं ५ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001428
Book TitleRitthnemichariyam Part 3 1
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorRamnish Tomar, Dalsukh Malvania, H C Bhayani
PublisherPrakrit Text Society Ahmedabad
Publication Year1996
Total Pages328
LanguagePrakrit, Apabhransh
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size13 MB
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