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________________ मोघ (व्य) मानुषोत्तरके अंक कूटपर रहनेवाला देव ५।६०६ मोघ (मोष) भाषा (पा) सत्य प्रवाद पूर्वको १२ भाषाओं में से एक भाषा १०॥९६ मोहन = विद्यास्त्र २५।४८ मोहनीय(पा) आत्माको स्वरूप से च्युत करनेवाला कर्म ५८०२१६ मौक (भौ) देशविशेष ३।४ मौखर्य (पा) अनर्थदण्डव्रतका अतिचार ५८५१७९ मौन = मुनियोंका १२१८२ मौलि = मुकुट २१८५ मौर्यपुत्र-(व्य) भगवान् महा वीरका सप्तम गणधर ३३४२ [य] यक्षदेवी (व्य) यक्षिल और देव सेनाकी पुत्री ६०।६३ यक्षलिक (व्य) यज्ञदत्त और यक्षिलाका पुत्र ३३।१५८ यक्षवर (भौ) अन्तिम सोलह द्वीपोंमें तेरहवां द्वीप ५।६२५ यक्षिल (व्य) एक वैश्य ६०।६३ यति कषायोंका अन्त करनेवाले विशिष्ट मुनि ३।६१ यति =तालगत गान्धर्वका एक प्रकार १९।१५१ यथाख्यातचारित्र (पा) मोहके अभावमें होनेवाला चारित्र ५६७८ यज्ञ (व्य) भगवान् ऋषभदेवका गणधर १२०५९ यज्ञगुप्त (व्य ) ऋषभदेवका गणधर १२।६३ ११९ शब्दानुक्रमणिका यज्ञदत्त (व्य ) ऋषभदेवका वणधर १२१६४ यज्ञदत्त, यक्षिला (व्य) इस नामका दम्पती ३३।१५८ यज्ञदेव (व्य) ऋषभदेवका गणधर १२।६३ यज्ञमित्र (व्य ) ऋषभदेवका गणधर १२१६४ यदु (व्य) हरिवंशके अन्तर्गत यदुवंशका स्थापक राजा १८।६ यदुनन्दन = वसुदेव २८।१४ यम (व्य) देवविशेष (लोकपाल) ५।३१७ यमकूट (भौ) निषध पर्वतकी उत्तर दिशामें सीतोदा नदीके तटपर स्थित कूट ५।१९२ यमदण्ड = विद्यास्त्र २५१४८ यमुना (व्य) मथुराके भानु सेठ की स्त्री ३३।९६ यव (पा) आठ यूकाओंका एक यव ७४० यवन (भौ) देशका नाम१११६६ यवन (व्य) एक राजा ५०१८४ यबु (व्य) भानुका पुत्र १८।३ यश:कूट (भौ) रुचिक गिरिका पश्चिम दिशा सम्बन्धी कूट ५७१४ यशःपाल (व्य) ग्यारह अंगके ज्ञाता एक आचार्य १६६४ यशस्कान्त (व्य) मानुषोत्तरके __ अश्मगर्भ कूटपर रहनेवाला देव ५।६०२ यशस्वान् (व्य ) मानुषोत्तर पर्वतके वैडूर्यकूटपर रहने वाला देव ५।६०२ यशस्विनी (व्य) धनदेवकी स्त्री ६०।९५ ९४५ यशस्वी (व्य) नौवाँ कुलकर ७।१६० यशोदा (व्य) सुनन्दगोपको स्त्री ३५।३० यशोदा(व्य) एक कन्या जिसका महावीरके साथ विवाह करनेकी जितशत्रुको इच्छा थी ६६८ यशोदया (व्य) यशोदाकी माता ६६१८ यशोधन (व्य ) एक राजा ५०।१२६ यशोधर (व्य) एक मुनिराज ३४।४५ यशोवर (भौ) मध्यम प्रैवेयकका प्रथम इन्द्रक ६।५२ यशोधर(व्य) मानुषोत्तर पर्वतके सौगन्धिक कूटपर रहने वाला देव ५।६०२ यशोधरा (व्य) रुचिकगिरिके विमलकूटपर रहनेवाली देवी ५।७०९ यशोधरा (व्य) अलकाके राजा सुदर्शन और रुधिराकी पुत्री २७७९ यशोभद्र (व्य) आचारांगके ज्ञाता एक आचार्य ११६५ यशोबाहु (व्य ) आचारांगके ज्ञाता एक आचार्य ११६५ याज्ञवल्क्य (व्य) एक परिव्राजक २१११३४ याम्य (पा) स्फटिक सालका ___दक्षिण गोपुर ५७१५८ यादव = वसुदेव १९५७ यादवेन्द्र (व्य) समुद्र विजय नमिनाथके पिता ५०१३ युक्तिक (व्य) राजा उग्रसेनका पुत्र ४८।३९ युक्त्यनुशासन (व्य) समन्तभद्र Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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