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________________ ९४४ मृगध्वज (व्य) जितशत्रुका पुत्र २८।१७ मृगशृङ्ग (व्य ) खमाली और कनक केशीका पुत्र २७।१२० मृगश्टङ्गिणी ( व्य ) सितकी स्त्री तापसी ४६।५४ मृगाङ्क (व्य ) गरुडांकका पुत्र १३।११ मृगायण (व्य) वर्धकि गाँवका एक ब्राह्मण २७।६१ मृगावती (व्य) हरिपुरके राजा पवनगिरिकी स्त्री १५।२३ मृतसंजीवनी = एक विद्या २२।७१ मृत्यु - आशंसा (पा) सल्लेखना - का अतिचार ५०।१८४ मृदङ्गमध्यविधि = एक उपवास ३४।६४ मृध = रण ४०।१ मेघ (व्य) मेघदलपुरका एक सेठ ४६।१५ मेघ (भी) सौधर्मयुगलका बीसवाँ इन्द्रक ६१४५ मेघ (व्य) यादव ५०।१२१ मेघ (व्य) समुद्रविजयका पुत्र ४८|४४ मेघा ( भी ) बालुकाप्रभा पृथिवी ४।२२० मेघकूट (भौ ) वि. द. नगरी २२।९६ मेघकूट (भौ) विजयार्धका एक नगर ४३।४९ मेघकर ( भी ) निषेध पर्वतकी उत्तर दिशा में सीतोदा नदीके तटपर स्थित कूट ५।१९२ मेघङ्करा (व्य) नन्दनवनमें रहने वाली दिक्कुमारी ५।३३२ मेघघोष (व्य ) मेघनादका पुत्र ६०।११८ Jain Education International हरिवंशपुराणे मेघदल (भी) एक नगर४६ । १४ मेघनाद ( व्य ) भद्रिलपुरका राजा ६०।११८ मेघनिनाद = रत्नायुधका एक हाथी २७।९६ मेघनाद (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२/३४ मेघपुर ( भी ) एक नगर ३३।१३५ मेघपुर ( भी ) विजयार्ध की उत्तर श्रेणीका एक नगर १५।२५ मेघनाद (व्य ) अरिञ्जयपुरका स्वामी २५/२ मेघमाल ( भी ) पश्चिम विदेहका वक्षारगिरि ५।२३२ मेघमाळ (भौ) वि. उ. नगरी २२।९१ मेघमाला (व्य) मथुराके राजा रत्नवीर्यकी स्त्री २७।१२५ मेघमालिनी ( व्य ) नन्दनवनमें रहनेवाली दिक्कुमारी ५/३३३ मेघमालिनी (व्य) नारद नामक देवकी देवी ६०१८० मेघमुख (व्य) म्लेच्छों का कुलदेवता ११।३२ मेघवती (व्य ) नन्दनवनमें रहनेवाली दिक्कुमारो देवी ५।३३२ मेघानीक (व्य) विनमिका पुत्र २२।१०४ मेघरथ (व्य) गिरिनगर के चित्र रथ राजाका पुत्र ३३।१५२ मेघरथ (व्य ) सद्द्भद्रिलपुरका राजा १८।११२ मेघवाहन (व्य ) भरतक्षेत्र चम्पा - पुरीका राजा ६४|४ मेघवेग ( व्य ) त्रिकूटाचलका स्वामी ४५।११५ मेघेश्वर (व्य) ऋषभदेवका गण For Private & Personal Use Only धर, दूसरा नाम जयकुमार १२१६७ मेरु (व्य) भगवान् ऋषभदेवका गणधर १२।५९ मेरु (भी) विदेहक्षेत्र में स्थित सुदर्शन मेरु नामका पर्वत १९७ मेरु (व्य) सिन्धुदेशके वीतभय नगरका स्वामी ४४।३३ मेरु (व्य) मथुरा के राजा रत्नवीर्य और मेघमालाका पुत्र, लान्तवेन्द्रका जीव २७।१३५* मेरु ( व्य ) श्रीकृष्ण के पक्षका राजा ५०/७० मेरुक (व्य ) तीसरा प्रतिनारायण ६०।२९१ रुद्र ( व्य ६०।१०३ मेरुदत्त (व्य) नग्नजित्का पुत्र, कृष्णका पक्षपाती ५२।२१ मेरुनन्दना (व्य) व्यन्तरकी स्त्री एक राजा = एक व्रतविशेष ६०।४६ मेरुपक्तिव्रत ३४।८५ मेरुमती (व्य ) गान्धारीकी माता ६०१९३ मेरुसतो (व्य ) गान्धारदेशकी पुष्कलावती नगरीके राजा इन्द्रगिरिकी स्त्री ४४/४५ मेदार्थ (व्य) भगवान् महावीर का दशम गणधर ३।४३ मोक (भी) देशका नाम ११।६५ मोक्ष (पा) अष्टकर्मसे रहित आत्माकी शुद्ध परिणति २।१०९ मोक्ष (पा) आग्रायणी पूर्वके चतुर्थप्राभृतका योगद्वार १०१८३ मोक्षण = विद्यास्त्र २५४४८ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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