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________________ काल (पा) परिणमनमें सहायक एक द्रव्य ५८।५६ काल (भौ) सातवीं पृथिवीके अप्रतिष्ठान इन्द्रककी पूर्व दिशामें स्थित महानरक ४११५८ काल (व्य) कालोदधिका रक्षक देव' ५१६३८ काल (पा) चक्रवर्तीकी एक निधि ११।११० काल (व्य) पाँचवाँ नारद ६०१५४८ काल-दिति देवीके द्वारा प्रदत्त विद्यानिकाय २२।५९ काल केशपुर (भौ ) वि. द. नगरी २२।९८ कालमुख (व्य) एक राजा ३१।९७ कालमुखी = एक विद्या २२/६६ कालयवन (व्य) राजा जरा सन्धका पुत्र १८।२४ कालश्वपाकी = विद्याधरोंकी एक जाति २६।१८ का संवर (व्य) मेघकूट नगरका राजा ४३१४९ कालान्जला = एक अटवी ४६।७ कालातिक्रम (पा) अतिथिका अतिचार ५८।१८३ कालिङ्गी (व्य) पूरणकी स्त्री १९.५ कालिन्दी ( भी ) यमुनानदी १४/२ कालिन्दी (व्य) सुभानुकी स्त्री ३३।९९ कालियाहि (व्य) यमुनाके ह्रदमें रहनेवाला एक सर्प ३६७ काली एक विद्या २२।६६ कालोदसागर ( भी ) धातकीखण्ड द्वीपको घेरकर स्थित कालोदधि समुद्र ५।५६२ = Jain Education International शब्दानुक्रमणिका काव्य = रमणीयार्थके प्रतिपादक शब्दविशेषों का समूह ११४४ काशि ( भी ) देशका ११।६४ नाम काष्ठा = दिशा ५४/७३ किन्नरोद्गीत ( भौ) विजयार्धका एक नगर १९।८० किरीटी (व्य) अर्जुन ५५/५ किल्विषक = देवोंकी एक जाति ३।१३६ किष्किन्ध (भौ) देशका नाम ११।७३ farm (पा) दो हाथोंका एक किष्कु ७१४५ कीचक (व्य) राजा चूलिकका पुत्र कीर्ति (पा) स्फटिकसालका पूर्व गोपुर ५७/५७ कीर्ति (द्वितीय) (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।२५ कीर्ति (व्य) केसरि सरोवरमें रहनेवाली देवी ५।१३० कोर्तिकूट (भौ)नील कुलाचलका पाँचवाँ कूट ५।१०० कीर्तिमती (व्य) रुचिकगिरिके रुचकोत्तर कूटपर रहनेवाली देवी ५।७१० कुकुन्दर = नितम्बों में पड़नेवाले गर्तविशेष ८|१४ कुञ्जरावर्त (भौ) वि. द. नगरी २२।९६ कुणिम ( व्य ) ऐलेयका पुत्र १७।२३ कुणीयान् (भौ ) देशका नाम ११।६५ कुण्डपुर (भौ) गोदावरीके निकट एक ग्राम ३१।३ कुण्डपुर (भी) महावीर स्वामीका जन्मस्थान ६६।७ fuse ( भौ) रुचिकगिरिका For Private & Personal Use Only ६०९ उत्तर दिशा सम्बन्धी कूट ५।७१६ कुण्डलगिरि (भौ ) कुण्डलवर द्वीपके मध्य में स्थित चूड़ीके आकारका एक पर्वत५ । ६८६ कुण्डलवर सागर (भौ) ग्यारहवाँ सागर ५६१८ कुण्डलवर द्वीप (भी) ग्यारहवां द्वीप ५।६१८ कुण्डला ( भी ) विदेहकी एक नगरी ५।२५९ कुण्डिन (भौ) विदर्भ देशकी वरदा नदीतटपर बसा, एक नगर, इसे कुणिमने बसाया था १७।२३ कुण्डिन (भौ) एक नगर ६० ३९ कुण्डिन (भी) एक नगर रुक्मिणी का जन्म स्थान ४२।३३ कुतुप = नटोंका समूह २२।१३ कुतीर्थध्याव मिथ्यामतरूपी अन्धकार १।१४ कुन्तल (भौ) देशका नाम ११ ॥७० कुम्ती (व्य ) अन्धकवृष्णिकी बहन, पाण्डुकी स्त्री १८।१५ कुन्थु (व्य) श्रेयांसनाथका प्रथम गणधर ६०|३४७ कुन्थु (व्य) सत्रहवें तीर्थंकर, छठे चक्रवर्ती ४५/२० कुन्थु (व्य ) अरनाथका प्रथम गणधर ६०।३४८ कुपात्र (पा) मिथ्यादर्शन ज्ञान चारित्रके धारक ७।११४ कुपूतना (व्य) कंसकी पूर्वभव सम्बन्धी विद्या देवता ३५।४२ कुप्यप्रमाणातिक्रम (पा) परिग्रह परिमाणाव्रतका अतिचार ५८।१७६ कुबेर (व्य) देवविशेष १।९९ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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