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________________ ७४६ हरिवंशपुराणे पूर्वलक्षाः कुमारेऽगुर्भरते सप्तसप्ततिः । वर्षाणां च सहस्रं तु मण्डलाधिपती मतम् ॥४९४॥ पष्टिवर्षसहस्राणि विजयो राज्यमूर्जितम् । एकपूर्वविहीनास्तु पूर्वलक्षाः षडेव तु ॥४९५॥ अङ्गलक्षास्त्रयोऽशीतिर्नवतिर्नवभिः सह । सहस्राणि नवान्यानि शतानि नवतिर्नव ॥४९६॥ दर्षलक्षास्त्रयोऽशीतिस्त्रिंशन्नवसहस्रकैः । चक्रिसंयमकालस्तु पूर्वलक्षेव केवलाः ॥४९७॥ पञ्चाशत्त सहस्राणि पूर्वाणां पूर्वकालयोः । त्रिंशदब्दसहस्राणि विजयः सगरस्य तु ॥४९८॥ एकान्नसप्ततिलंक्षा पूर्वाणां नवतिर्नव । सहस्राणि नवापीह शतानि नवतिर्नव ॥१९९॥ पूर्वाङ्गप्रमितिः पूर्वाः सप्ततिश्च सहस्रकैः । राज्यं लक्षास्त्रयोऽशीतिः पूर्वलक्षव संयमः ॥५०॥ पञ्चविंशतिसंख्याब्दसहस्राणि कुमारकः । मण्डलेशश्च मघवान् जये दशसहस्रवान् ॥५०१॥ तिस्रोऽस्य वर्षलक्षास्तु नवत्यब्दसहस्रकः । राज्यं तपस्तु पञ्चाशत्सहस्राणि तपस्विनः ॥५०२॥ सनस्कुमारकौमार्य मण्डलेशत्वमेव च । सहस्त्राणि तु पञ्चाशद्विजयो दश तानि वै ॥५०३॥ नवस्यब्दसहस्त्राणि राज्यं प्राज्यमुदीरितम् । वर्षलक्षास्ततस्तस्य संयमः संयमात्मनः ॥५०॥ शान्तेर्माण्डलिकत्वे तु पञ्चविंशतिरेव तु । सहस्राण्यष्टशत्येव विजये गदितं परम् ॥५०५॥ पहले भरत चक्रवर्तीका आयुकाल चौरासी लाख पूर्वका था, उसमें सतहत्तर लाख पूर्व तो कुमार कालमें बीते, एक हजार वर्ष मण्डलेश्वर अवस्थामें व्यतीत हुए, साठ हजार वर्ष सक दिग्विजय किया, एक पूर्व कम छह लाख पूर्व चक्रवर्ती होकर राज्य किया तथा एक लाख पूर्व तेरासी लाख निन्यानबे हजार नौ सौ निन्यानबे पूर्वांग और तेरासी लाख नौ हजार तोस वर्ष पर्यन्त संयमी तथा केवली रहे* ॥४९४-४९७।। दूसरे सगर चक्रवर्तीकी आयु बहत्तर लाख पूर्व थी उसमें पचास हजार लाख पूर्व तो कमारकालमें बीते. इतने ही मण्डलेश्वर अवस्थामें व्यतीत हए. तीस हजार वर्ष दिग्विजयमें गये, उनहत्तर लाख सत्तर हजार पूर्व, निन्यानबे हजार नौ सौ निन्यानबे पूर्वांग और तेरासी लाख वर्ष चक्रवर्ती होकर राज्य किया और एक लाख पूर्व तक संयमी रहे ।।४९८-५००॥ __ तीसरे मघवा चक्रवर्तीकी कुल आयु पाँच लाख वर्षकी थी। उसमें पचीस हजार वर्ष कुमारकालमें, पचीस हजार वर्ष माण्डलीक अवस्थामें, दस हजार वर्ष दिग्विजयमें, तीन लाख नब्बे हजार वर्ष चक्रवर्ती होकर राज्यकार्यमें और पचास हजार वर्ष संयमी अवस्थामें व्यतीत हुए ॥५०१-५०२।। चौथे सनत्कुमार चक्रवर्तीको कुल आयु तीन लाख वर्षको थी। उसमें पचास हजार वर्ष कुमारकालमें, पचास हजार वर्ष माण्डलीक अवस्थामें, दस हजार वर्ष दिग्विजयमें, नब्बे हजार वर्ष चक्रवर्ती होकर राज्यके उपभोगमें और एक लाख वर्ष संयमो अवस्थामें व्यतीत हुए ॥५०३-५०४॥ पांचवें शान्तिनाथ चक्रवर्तीको कुल आयु एक लाख वर्षकी थी, उसमें पचीस हजार वर्ष कुमार अवस्थामें, पच्चीस हजार वर्ष माण्डलोक अबस्थामें, आठ सौ वर्ष दिग्विजयमें बीते १. एकपूर्वाङ्गहीनास्तु म. । २. केवलं क. । ३. सप्तसप्तसहस्रकैः क., सप्तत्यब्दसहस्रः ख. । ४. तिस्रस्तु क. ङ.। ५. सहस्राणि । ६. तु शब्दात् कौमार्य (क. टि.)। * तिलोयपण्णत्तिमें चौरासी लाख पूर्व कुल आयु, सतहत्तर लाख पूर्व कुमारकाल, एक हजार वर्ष मण्डलेश्वर राजा, साठ हजार वर्ष दिग्विजय, इकसठ हजार वर्ष कम छह लाख पूर्व चक्रवर्ती होकर राज्यकाल और एक लाख पूर्व संयमकाल.बतलाया है। + तिलोयपण्णत्तिमें चक्रवर्ती होकर राज्य करनेका काल तीस हजार वर्ष कम सत्तर लाख पूर्व बतलाया है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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