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________________ ४१ वादी संजयके अनुयायी तत्त्वको अनिश्चित ही बतलाते थे । उपर्युक्त युगलोंमें लगनेवाली चार कोटियाँ इस प्रकार होती थीं १. सदसद्वाद ( १ ) तत्त्व सत् है | ( २ ) तत्त्व असत् है । ३ ) तत्त्व उभय है । ( ४ ) तत्त्व अनुभय है । २. शाश्वत - अशाश्वतवाद प्रस्तावना ( १ ) तत्त्व शाश्वत है । ( २ ) तत्त्व अशाश्वत है | ( ३ ) तत्त्व उभय है । ( ४ ) तत्त्व अनुभय है । ३. द्वैत-अद्वैतवाद ( १ ) तत्त्व द्वैत है । ( २ ) तत्त्व अद्वैत है । ( ३ ) तत्त्व उभय है । ( ४ ) तत्त्व अनुभय है । ४. वक्तव्यावक्तव्यवाद ( १ ) तत्त्व वक्तव्य है । ( २ ) तत्त्व अवक्तव्य है । ( ३ ) तत्त्व उभय है । ( ४ ) तत्त्व अनुभय है । १. दीघनिकाय सामञ्ञफलमुत्तमें संजयका मत 'अमराविक्षेपवाद' के रूप में मिलता है । अमरा एक प्रकारकी मछलीका नाम है । उसके समान विक्षेप ( चंचलता - अस्थिरता ) का होना - मानना अमराविक्षेपवाद है । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001170
Book TitleAptamimansa
Original Sutra AuthorSamantbhadracharya
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1978
Total Pages190
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size9 MB
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