Book Title: Uttaradhyayana Sutra
Author(s): Sudharmaswami, 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 40
________________ गाजिझियाजेदजराज पाणासिं से यया जेरसयाली हाएगा। एया काथा इंपवेदीया । एते सुजा ऐप डिलेट् सायएते काएयप्रायदंडे । एते सुया वीपरी यामु विति रजा तिवहिंव दिला संयता। बीयाना संजए चाय दंडे। श्राहा सेलोए अधोबिया इंजे हिंसन्याय्सारोशित थाजे द्वीवस्त्रावर्तनी वनस्पती बेदे ते हवा मरतापी मतकरेल नईमीं तियाया||नरा परे पंच सिहाक मारा/जुवालगाम झिम थेरगायावयत तिमान व एप्ली गा४॥ तमि वागावात एक रकस बीय गाड्या पोयजराकारस संसेउ ऊशिया (शए तेहि बहिंका एहिजे वाद्यप राणी या मासा कायव नारंसी नपरी ही शतचिमा तती या नासाजवेदात्तातय्पता/जब नईएसा प्राणानीयं मांगनी मैत्रायते पुढवा जीवापुर हाग गोवा ऊजी वापुढो सत्तातिर कसबायाशा हाथ रात साया था एवं कायन्त्रा दिया। इतावएवजी ढ़कानावरे वाजईका एशसद्वात्रिऋणुनुतिभिईदिए मिले दियाासत्रे इतऽषाया तो सच्चे हिंसयाउटे हेयं तारी केतील सावरावीर तिंकुझसे ति नीवारामा हियधादांत नातुआ रोद्याच्या यमु तेजिइंदा ए| वाला इंसती सदा गागंमिसुन गरे रात हागारसमा रसा विपुलता नौवाग्रहवानथापुन्नंता । एवमेयमहझया हा दांयायजे पाला हांतीत सधावशतिसंसा २२ रखण्डाशात म्हात्रचित्तिनोव९७ जेय दाएं|पसंसतिविदमाचेतिया। एंगा जेयांप डिसेहित वित्तियकरंति

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