Book Title: Sramana 1991 01
Author(s): Ashok Kumar Singh
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 33
________________ सन्दर्भ - सूची १. उत्तराध्ययन १९२४२, ४४, ४६ २. अंगुत्तरनिकाय - सुत्तनिपात - उद्धृत भगवान् बुद्ध, पृ० २२६ ३. गीता ४१३३, ४१२६-२८ ४. आचारांग - प्रथम श्रुतस्कन्ध, उपधानश्रुत ५. उत्तराध्ययन, अध्याय ३० । ६. अन्तकृद्दशांग वर्ग का काली आदि दस रानियों का तपस्या वर्णन | ७. उत्तराध्ययन, अध्याय २६ । अनुयोगद्वारसूत्र में षडावश्यक गृहस्थ और श्रमण दोनों के लिए आवश्यक हैं । ६. उपासक दशांग, अध्याय ६ । १६६। १०. अंगुत्तरनिकाय ३।७० । ११. भगवतीसूत्र १२. अंगुत्तरनिकाय ३।७०, ३।३७ । ८. १३. सूत्रकृतांग, प्रथम श्रुतस्कन्ध, अध्याय ६ । १४. राजप्रश्नीय १६६ । १५. उपासकदशांग १२ । १६. प्रो० ढाकी से व्यक्तिगत चर्चा के आधार पर । १७. भारतीय संस्कृति के विकास में जैनवाङ्मय का अवदान ( प्रथम खण्ड ) - डा० नेमिचन्द्र शास्त्री, देखें पुष्प कर्म तथा देवपूजा विकास और विधि, पृ० ३८६ से ३८९ । १८. राजप्रश्नीय २०० । १६. जैन साहित्य का बृहद् इतिहास भाग ५, पृ० । २०. सम्बोध प्रकरण, गुर्वधिकार । २१. जैन साहित्य का इतिहास भाग ५। २२. राजप्रश्नीय ७२-१०६ । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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