Book Title: Padarth Prakash 25 Mandal Prakaranam
Author(s): Vijayhemchandrasuri
Publisher: Sanghvi Ambalal Ratanchand Jain Dharmik Trust

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Page 162
________________ - अभीइनक्खत्ते / सब्वत्थ पढमसमए, जुगस्स आइं विआणाहि / / 1 / / '' सर्वत्रेति भरतैरावतविदेहेष भाव्यम् / अवसर्पिण्यां षण्णामरकाणामप्यादिरत्रैव / विदेहेषु यद्याप्यरकाणामभावस्तथापि पञ्चवत्सरात्मकस्य युगस्य सद्भावात् / / मासपञ्चकवर्षपञ्चकस्वरूपं श्रीमुनिचन्द्रसूरिकृतकाल- शतक-प्रवचनसारोद्धारादिग्रन्थेभ्योऽवसेयम् / दिनादिसंख्या तु यन्त्रकद्वयादवधार्या२९ 30 27 31 30 दिनसंख्या . 32 31 21 1210 भागाः 62 62 67 1240 भागकरणांकाः चन्द्रमास . सूर्यमास. नक्षत्रमास. अभिवर्धित ऋतुमास. पंचमासनाम. मास. 62 6067 2 61 युगे मासानां संख्या 354 354 383 354 383 दिनसंख्या. 12 12 44 12 44 आगतभागसंख्या . 62 62 62 62 62 भागकरणांकाः चन्द्रसंव- चन्द्रसंव- अभिवर्धित- चन्द्रसंव- अभिवर्धित- पंचवर्षेरेको त्सर: त्सरः संवत्सरः त्सरः संवत्सरः युग : तत्र. मास 12 मास 12 मास 13 मास 12 मास 13 दिन 1830 किञ्च सर्वबाह्यमण्डलस्थस्य पुष्यस्य भोग : सूर्याचन्द्रमसोस्सर्वाभ्यन्तरमण्डलस्थयो: स्यात् / तथा सर्वाभ्यन्तरमण्डलस्थिताभिजिद्भोगः सर्वबाह्ये मण्डले तयो : स्यादित्यत्रायनापेक्षो भोगो न तु मण्डलैकत्वं कारणम् / स्थानाड़े नवमाध्ययनप्रान्तेऽपि-''अभिई सवण धणिल्हा , रेवइ असिणी मिगसिरं पूसो / हत्थो चित्ता य तहा, पच्छंभागा णव हवंति ||1||'' एतद्वृत्ति :-'पच्छंभाग' त्ति पश्चाद्भागश्चन्द्रेण भोगो तानि पश्चाद्भागानि, चन्द्रोऽतिक्रम्य यानि भुङ्क्ते पृष्ठं दत्त्वेत्यर्थः / इत्यादि दृश्यम् / / 79 / / चन्द्रसूर्ययोर्मण्डलादिस्वरूपं प्रकाश्याथ नक्षत्रतारकयोः स्वरूपमाह 47

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