Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh, 
Publisher: Nag Prakashan Delhi

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Page 13
________________ श्रीमन्महाभारतम् : : श्लोकानुक्रमणी अजिह्मत्वसशाठ्यं च(शांति)१५३.८१ अजैकपादहिर्बुध्यः (अनु) १५०.१२ अशात मेक राष्ट्र च (आ) ६१.५१ अज्ञानाद्वालया प्रत्न (वन) १२२.२३ अटव्यां दुर्गकान्तारे (विरा) ६.३२ अजिह्ममशठ मार्ग (शांति) ६६.१७ अजैकपादहिर्बुध्न्यो (शांति) २०८.१९ अज्ञातवासचर्या च (शल्य) ६३.४३ अज्ञानाद्ब्राह्मणं हत्वा (अनु) ६.३७ अट्टशूललप्रहरणे (भीष्म) २३.७ अजिब रशठक्रोधह (शांति) २६३.१२ अजोक्षा चन्दनं वीणा (उद्योग)४०.१० अज्ञातवास गहन (आश्रम) ११.२१ अज्ञानान्निरयं याति (शांति) १५६.३ अट्टशूला जनपदाः (वन) १८८.४२ अजीणस्त्वभिहन्यन्ते (अन) १२.४ अजाग्निवरूणी मषः (शाति) ७८.६ अज्ञातवास घोरं च (उद्योग) ६.३१ अज्ञानेनावृतो लोक (वन) ३१३.८२ अट्टशूला जनपदाः (वन) १९०.५२ अजेन धुन्धना चैव (अन) ११५.७५ अजोऽग्निवरुणो मेषः (अनु) ६४.४७ अज्ञातवासं बसता (कर्ण) ५०.२२ अज्ञानेनावृतो लोको (शांति)२६६.४० अठिदाः पाशिवाटाश्च (भीष्म) ६.६४ अजेन यष्टव्यमिति (शांति) ३३७.३ अजोनामाऽभद्राजा (बन) २७४.६ अज्ञा अज्ञातवासो बस्तव्यो (वन) ४६.५८ अज्ञायमानापि सती (वन) ६६.१८ अणी कृत्वैलपत्र (द्रोण) २०२.७३ अजेयश्चाप्यसो वीरो (शल्य) ७.२६ अजोऽपि सन्नथ्ययात्मा (भीम) २६.६ अशातिनोऽपि न सखा (शांति४ अजायमाने च धनञ्जये (भीष्म)८५.२५ अणीमाण्डव्य इति च (आ) १०८.८ अजेयः समरे चापि (भीम) ११२.२३ अजो महाहः स्वाभा (अनु) १४६.६६ अज्ञातैर्यदि वा ज्ञातः (वन) २५०.३ अज्ञायमाने च मते (उद्योग) १.२४ अनुरप्यचारश्च (वन) १५७.२० अजेयस्त्व त्रिभिर्लोकः (वन) ३६.७६ अजोऽश्वः क्षमित्ये (शांति)१४२.२६ ।। अज्ञायमाने हीनत्वे (शांति) ६६.१५ अणुव्हच्छिरा भूत्वा (वन) १६७.२६ अजेयस्त्व रणऽरीणा (भीष्म) २३.१६ अजो हि शास्त्रम गिल (मभा) ६६.८ अज्ञानतिमिरान्धस्य (आ) १.८४ अज्ञो जन्तुरनीशोय (वन) ३०.२८ अणुब हत्कृशः स्थूलो (अनु) १४६.१०३ अजो नित्वावुभौ प्राहु (शांति)३१८.४५ अजेयस्त्व रणेऽरीणा वन) २३१.१०८ अज्ञानतप्तो विषये (शांति) २०४.५ अजन रोचना चव (अन्) १२३.१७ अणोरणीयान सुमना: (उद्योग)४६.३१ अज्येष्ठमकनिष्ठ (शांति) २२७.१०४ अजेवाः पाण्डवाः (द्रोण) १२२.२३ अज्ञानप्रभवो मोहः (शांति) १६३.११ अञ्जनस्य कुले जाता (द्रोण)१२१.२५ अण्डजा जन्तबश्चव (आश्व) ३६.२४ अज्ञवाटस्य ते भूमिः (वन) २५५.१८ अजेयाः पाण्डवास्त (द्रोण) १३३.६ अशानप्रभवो लोभो (शांति) १६३.२१ अञ्जलिः शपथः (आ) १४०.६७ अण्डनातं तु ब्रह्माणं (अनु) १५३.१६ अज्ञश्चाश्रद्दधनश्च (भीष्म) २८.४० अजेयाः पुरुष रन्यै (भीष्म) १२२.३० अज्ञानसागरो घोरो (शांति) ३०८.५० अञ्जलि शपथ (शांति) १४०.१७ अजवानि विजानी (आश्व) ४२.३५ अजेया ब्राह्मणाराज (अनु) १५३.३ अज्ञातचर्यया बासो (आ) २.१०८ बजोगतिभिरायम्य (कर्ण) २२.२६ बण्डजे जन्मनि पुनः (शांति)३४८.४४ अज्ञानस्य प्रवृत्ति च (शांति) १५६.४ अजेयो पर्जनः संख्ये (आ) २०१.१३ अज्ञातचर्या बलानाम (उद्योग) ९०.५६ अज्ञानाज्ज्ञानतो वापि (वन) ८३.१४३ अटता तु ततो रशान्ना (कर्ण) ४५.५ अन् विभेद विनता (आ) . १६.१७ अजेयो हर्जुन: (उद्योग) १२४.५० अज्ञातं कर्म कृत्वा क(वन )२००.१०३ अज्ञानात्त कृताहिसा (शांति)२६१.१२ अटमानः कदाचित्स्वान् (आ) १३.१५ बडमेतज्जले न्यस्तं (उद्योग) ६६.१७ अजेयो वासवेनापि (शल्य) १६.२० अज्ञातं कार्तवीर्येण (शाति) ४६.४७ अटमानोऽथ तान्मार्गे (अनु) १३.२६ अज्ञानात्पीरपृच्छामि (शांति) ३१०.७. अजेयो समरे यत्ती (भीष्म) ६६.१२ अज्ञातं च विराटस्य (विरा) अण्डानि बिभ्रति स्वानि (आ)७४.५५ १३.६ अज्ञानादि क्षिपबाणान् (कर्ण)४२.३६ अटवीशिखराश्चैव (भीष्म) ६.४८ अण्डाभ्यां विनतायास्तु (आ) १६.१६ बजेयो समरे वृद्धौ (उद्योग) १७०.८ अज्ञातमस्य धर्मस्य (शांति) १६६.५३ अज्ञानाद्यत्कृतं पापं (अन) ५०.२४ अटव्या च सुघोरायां (अनु) १२.२० अण्डेम्यस्तपथपुष्टे (शांति) २६१.२७ Jan Education Intersalon For Pra Personal use only

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