Book Title: Jain Puran kosha
Author(s): Pravinchandra Jain, Darbarilal Kothiya, Kasturchand Suman
Publisher: Jain Vidyasansthan Rajasthan

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Page 571
________________ सम्पादकों का परिचय प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन अन्य नाम -प्रो० प्रवीणचन्द्र जैन अध्ययन अनुसंधान की निरन्तरता हेतु १९७० में उच्च जन्म तिथि -१६ अप्रैल १९०९ ( चैत्र कृष्णा तेरस, सम्बत् १९६६ ) स्तरीय अध्ययन अनुसंधान संस्थान जयपुर की स्थापना एवं जन्म स्थान -जयपुर उसका संचालन । शिक्षा -प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के साथ उर्दू-फारसी का -बाल मन्दिर, बाल शिक्षा मन्दिर, श्री महावीर दिगम्बर अध्ययन । जैन शिक्षा परिषद, श्री महावीर दिगम्बर जैन माध्यमिक -संस्कृत में विशेष रुचि के कारण प्रवेशिका, उपाध्याय, विद्यालय, राजस्थान शिक्षक संघ तथा जैनविद्या संस्थान शास्त्री एवं जैनधर्म विशारद परीक्षाओं में उत्तीर्ण । श्रीमहावीरजी की स्थापना और संचालन में सहयोग । -आगरा विश्वविद्यालय से एम० ए० संस्कृत की परीक्षा में -राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा प्रथम श्रेणी व प्रथम स्थान । बोर्ड, दिल्ली, आगरा विश्वविद्यालय, आगरा, राजस्थान -आगरा विश्वविद्यालय से ही एम० ए० हिन्दी-प्रथम श्रेणी, विश्वविद्यालय, जयपुर, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वपंचम स्थान विद्यालय, उदयपुर, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, -हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग की साहित्यरत्न परीक्षा जोधपुर में सीनेट, ऐकेडमिक कौन्सिल, रिसर्च बोर्ड, भाषा विज्ञान में सर्वोच्चता के साथ उत्तीर्ण । पाठ्यक्रम समिति, शिक्षक चयन समिति आदि में सदस्य । सेवाएं -प्रधान हिन्दी अध्यापक, दरबार हाई स्कूल, जयपुर । आजीवन सदस्यता-भण्डारकर ओरियन्टल रिसर्च इन्स्टीट्यूट, पूना । -प्रवक्ता, हिन्दी विभाग, पोद्दार कालेज, नवलगढ़। सदस्यता -जयपुर राज्य संस्कृत शिक्षा मण्डल, जयपुर, -अध्यक्ष, स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग, महाराजा कालेज, -राजस्थान राज्य संस्कृत शिक्षा मण्डल, जयपुर, जयपुर। -राजस्थान शिक्षा सलाहकार समिति, - उप प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय, कोटा । -राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर । -प्राचार्य, महाराजा कालेज, जयपुर रचनाए -महाराजा मानसिंह महारानी श्री जया कालेज, भरतपुर; -हिन्दी व्याकरण तत्त्व डुगर कालेज बीकानेर -अलंकारों का उद्भव और विकास ज्ञान-विज्ञान महाविद्यालय, वनस्थली विद्यापीठ । -भारतीय संस्कृति -विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विशिष्ट शिक्षक सेवा -वेदोत्तर देव शास्त्र योजना के तहत संस्कृत विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय सम्पावन -लोकजीवन जयपुर में ५ वर्ष तक अध्यापन । -राजस्थान युनीवर्सिटी स्टडीज इन सस्कृत -जैन विद्या संस्थान श्रीमहावीरजी के मानद निदेशक । -अध्ययन अनुसधान ( शोध पत्रिका) -२० से अधिक शोध-छात्रों को पीएच०डी० उपाधि -जैनविद्या ( शोष पत्रिका ) एवं हेतु निर्देशन, जिसमें १७ शोध छात्रों ने उपाधि प्राप्त की। -अनेक शोध लेख। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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